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Health & wealth: 2016
For Skin eruptions with yellow pus. Use - Calcarea Sulphurica 6x. Dose - 2 tabs. Twice daily.
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It is important to measure yourself regularly, remembering that your bra size can alter due to exercise, diet or pregnancy.
Bra Size (underbust)
Measuring in centimetres place the tape measure around your rib cage immediately under the bust. The tape should be held firmly, but not tightly so that you can breathe easily - see table below.
Cup Size (full bust)
Measure around your bust at the fullest part. Ensure the tape measure is not too tight or too loose and straight across your back.
The difference between this measurement and your calculated underbust size is used to determine your bra cup size as follows:
Less than 1 inch - AA Cup, 1 inch - A Cup, 2 inches - B Cup, 3 inches - C Cup, 4 inches - D Cup, 5 inches - DD Cup, 6 inches - E Cup, 7 inches - F Cup, 8 inches - G Cup
परिवार में बच्चे की किलकारी सुनना सभी को पसंद है । यह सौभाग्य सभी दंपतियों के खुशी का पल होता है । कुछ दंपति निसंतान होने से हताश निराश हो जाते हैं । अकसर 4-5 साल से भी अधिक समय से लगातार शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर युगल दंपति को Pregnancy से हताश होना Infertility समस्या कहलाती है । जिसे आम भाषा में बांझपन संज्ञा दी जाती है । जो कि गलत है । इनफर्टिलिटी मुख्यतय दो तरह से होती है । पहली जन्मजात जिसे ‘बन्ध्या‘ बांझपन से जाना जाता है। और दूसरी ‘मृतवत्सा वन्ध्या‘ से जाना जाता है, जिसमें पहला बच्चा होने पर दूसरा बच्चा नही होता । परन्तु गर्भाधान उपचार के माध्यम से दोनो तरह के इनफर्टिलिटी का उपचार सम्भव है।
निसंतान से बचने का सक्षम इनफर्टिलिटी विधि वरदान के रूप में है । जिससे निसंतान हताश निराश दंपतियों को आसानी से छुटकारा मिल जाता है । और घर में किलकारी गूंज उठती है । बच्चे नहीं होने पर महिला को केवल दोष देना गलत है । Infertility समस्या महिलाओं और पुरूषों दोनों में हो सकती है । बिना कारण के महिलाओं को दोषी मानना गलत है । ज्यादात्तर अन्दुरूनी महिला पुरूष दोनो में भी बराबर हो पाई गई है । जिसे इनफर्टिलिटी पद्धति द्धारा असानी से ठीक किया जाता है । आधुनिक सफल पद्धति से दंपतियों को निराश हताश होने की जरूरत नहीं है । दंपति एक्सपर्ट डाॅक्टर Dr. Prakash से बांझपन / Infertility Treatment सलाह उपचार करवायें । पुरानी, अंधविश्वार परम्परा से मुक्ति पाकर साइंस की सहायता से बांझपन अभिषाप से आसानी से मुक्ति पायें ।
Infertility -
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इनफर्टिलिटी के कारण / Infertility Causes -
Infertility Causes -
बदलते समय में बिगड़ते दिनचर्या, गलत खानपान, गलत जीवन -शैली के कारण Fertility / प्रजन्न क्षमता में दिन प्रतिदिन घट रही है । युवा वर्ग Infertility / का शिकार हो रहा है । प्रजन्न क्षमता घटने से संतान सुख जल्दी नहीं पाते ।
पुरूषों में इनफर्टिलिटी / Male Infertility -
पुरूषो में इनफर्टिलिटी गड़बड़ का कारण मुख्यरूप से खान पान और दिनचर्या ।
इत्यादि कारणों से शुक्राणुओं संख्या में इमबैलेंस होना है । जिससे अन्दर ही अन्दर infertility problem हो जाती है और व्यक्ति अनजान रहता है और दुष्परिणाम शादी के उपरान्त सामने आते हैं।
महिलाओं में इनफर्टिलिटी / Female Infertility -
श्वेत प्रदर ठीक न होना / White Discharge, Continue
गर्भनिरोधक गोलियां सेवन / Unwanted, Pills Side Effects
इन्दोमेत्रीओसिस विकार / Endometriosis
गर्भाशय में हवा ठंड़ प्रवेश / Endometriosis Colon
अण्डाशय चोट के कारण अबाॅरशन / Endometriosis Abortion
पी आई डी गर्भपात / PID abortion
21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना.
पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना.
पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं.
मासिक चक्र में पीरियड्स न आना.
पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना.
मासिक चक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना.
त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है.
सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना.
होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास.
बालों का झड़ना या पतला होना.
वजन बढ़ना.
निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है.
सैक्स के दौरान दर्द होना.
संतान सुख प्राप्त व्यक्तियों की सूचि -
मनीष कुमार, छावनी, बेतिया ।
🎁
चुन्नीलाल प्रसाद, गुलाब बाग, बेतिया ।
🎁
संजय कुमार, कमलनाथ नगर, बेतिया ।
🎁
पुरुषों की प्रजनन अक्षमता के मुख्य कारण हैं- ▶ शुक्राणुओं की संख्या में कमी,
▶ उन की गति में कमी और
▶ टेस्टोस्टेरौन की कमी.
▶ शुक्राणुओं की संख्या में कमी से फर्टिलाइजेशन (निशेचन) की संभावना में बहुत कमी आती है, जबकि उन की गति धीमी पड़ने से शुक्राणु तेजी से तैर कर एग (अंडाणु) तक पहुंच कर उसे फर्टिलाइज करने में असफल रहता है.
▶ टेस्टोस्टेरौन एक हारमोन है, जिस की शुक्राणु उत्पन्न करने में बड़ी भूमिका होती है.
▶ समस्या के ये कारण बदलते रहते हैं और इन में 1 या अधिक की उपस्थिति से पुरुष की प्रजनन क्षमता छिन सकती है.
▶ शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता में कमी के कई कारण हो सकते हैं जैसे -
☑ आनुवंशिक कारण,
☑ टेस्टिक्युलर (अंडकोश) की समस्या,
☑ क्रोनिक प्रौस्टेट का संक्रमण,
☑ स्क्रोटम की नसों का फूला होना और
☑ अंडकोश का सही से नीचे नहीं आना.
शुक्राणु बनने में बाधक कुछ अन्य कारण भी हैं - कुछ विशेष रसायनों, धातुओं व विषैले तत्त्वों का अधिक प्रयोग और कैंसर की चिकित्सा, जिस में रेडिएशन या कीमोथेरैपी शामिल है .
कुछ अन्य कारण भी हैं जैसे - तंबाकू का सेवन, शराब पीना, जिस से पुरुषों के लिंग में पर्याप्त उत्तेजना नहीं होती और शुक्राणुओं की संख्या घट जाती है.
मोटापा भी एक कारण है, जिस के परिणामस्वरूप शुक्राणुओं की संख्या और टेस्टोस्टेरौन का स्तर गिर जाता है. इन सब के अलावा व्यायाम न करना या कम करना भी एक बड़ा कारण है.
काम की जगह जैसे फैक्टरी में अत्यधिक तापमान होना भी इस समस्या को जन्म देता है. इस से अंडकोश का तापमान बढ़ जाता है और शुक्राणु बनने की प्रक्रिया बाधित होती है.
🔲 बहुत से पुरुषों को उन के नपुंसक होने का तब तक सच नहीं पता चलता जब तक दोनों पति - पत्नी संतान का सपना सच करने का प्रयास प्रारम्भ नहीं करते.
🔲 ऐसे में पति - पत्नी को चाहिए कि स्वाभाविक रूप से गर्भधारण के लिए 1 साल का समय दें और
🔲 उस के बाद चिकित्सक से सलाह लें.
🔲 यदि पत्नी 35 वर्ष से अधिक की हो तो 6 माह के प्रयास के बाद ही उस की उर्वरता की जांच आवश्यक है.
🔲 पुरुषों की प्रजनन क्षमता की जांच में शामिल है - 🌟 वीर्य का विश्लेषण, 🌟 रक्त की जांच 🌟 अल्ट्रासाउंड और 🌟 जेनेटिक टैस्ट. समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए चिकित्सक 1 या अधिक जांचें करवा सकते हैं.
पुरुष नपुंसकता के संभावित कारण -
- हारमोन असंतुलन.
- संक्रमण जैसे कि ऐपिडिडिमिस या टेस्टिकल्स में सूजन अथवा यौन संबंध में कुछ संक्रमण.
- इम्यूनिटी की समस्याएं या बीमारियां.
- वीर्यपात की समस्याएं.
- सैलियक डिजीज जो ग्लूटेन के प्रति हाइपर सैंसिटिव है. ग्लूटेन फ्री आहार अपनाने से सुधार हो सकता है.
- वैरिकोसेले जो स्क्रोटम में नसों का बड़ा होना है.
- कैंसर और नौनमैलिग्नैंट ट्यूमर
वीर्यपात में शुक्राणु नहीं होने पर इस समस्या को ऐजुस्पर्मिया कहते हैं.
यह 2 प्रकार की होती है: -
औब्स्ट्रक्टिव ऐजुस्पर्मिया: -टेस्टिस में शुक्राणु बनता तो है पर इसे ले जाने वाली नली के बंद रहने से यह वीर्य के साथ नहीं निकलता.
नौनऔब्स्ट्रक्टिव ऐजुस्पर्मिया: - टेस्टिस में शुक्राणु नहीं बनता है. चिकित्सा और आधुनिक उपचार से गर्भधारण हो सकता है पर इस की संभावना कम होती है.
नपुंसकता की जांच
- चिकित्सा का इतिहास: पारिवारिक इतिहास :- ताकि व्याधिग्रस्त की चिकित्सा समस्या, पहले हुई सर्जरी और औषधयों का रिकॉर्ड रखा जा सके.
- शारीरिक परीक्षण: शारीरिक विषंगतियों की जांच.
- रक्त जांच: टेस्टोस्टेरौन और फौलिकल स्टिम्यूलेटिंग हारमोन (एफएसएच) के स्तर की जांच.
मानक वीर्य विश्लेषण: निम्नलिखित मूल्यांकन के लिए: -
- गाढ़ापन वीर्य के प्राप्त नमूने में स्पर्माटाजोआ की संख्या.
- गतिशीलता: स्पर्माटाजोआ के चलने की गति
- संरचना: शुक्राणु की संरचनात्मक विकृति का आकलन.
यदि शुक्राणु बिलकुल नहीं हों तो वीर्य की अतिरिक्त जांच होती है, जिसे पैलेट ऐनालिसिस कहते हैं.
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ या हेल्दी पुरूष में 15 मिलियन शुक्राणु की कोशिकाओं का होना काफी आवश्यक होता है। जिसमें स्वस्थ शुक्राणु के इन लक्षणों के अलावा रूप, संरचना और गतिशीलता का होना आवश्यक माना जाता है। और इसकी कमी ही अनहेल्दी शुक्राणु के लक्षणों का होना पाया जाता है। जिसमें पुरुष में नपुंसकता और सेक्स करने के इच्छा में कमी होने लगती है और पूरी लाइफ पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है।
अपने आहार में स्वास्थ्यवर्द्धक और हेल्दी भोजन खाने का सबसे ज्यादा उपयोग करे, अधिक से अधिक प्रोटीन्स, विटामिन्स हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फल, फाइबर जैसी चीजों को अपने आहार में शामिल कर शरीर को एक नई उर्जा प्रदान करें।
अध्ययन के अनुसार जो लोग अधिक से अधिक बढ़ते तापमान के संपर्क में रहते है उनके शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आती है। यदि आप जल्द ही पिता बनने की सोच रहे है तो गर्म बाथटब, गर्म शावर, लेपटॉप को गोद में रखकर काम करने से भी दूर रहें। इसकी बढ़ती हिटिग आपकी शुक्राणु की क्षमता को कम कर नंपुसंक बना सकती है इसलिये जो लोग लबं समय तक इन गर्म चीजों के संपर्क में रहते है। उनके शुक्राणुओं पर इसका बुरा प्रभाव देखने को मिलता है।इसलिये कोशिश यही करें कि इस दौरान आप ठंडे पानी का उपयोग करें।
यदि आप अपने शरीर को स्वस्थ रखने के साथ शुक्राणु को बढ़ाना चाहते हैं तो तुरन्त ही ध्रुमपान का सेवन करना बंद कर दें। एक पैक सिगरेट पीने से यह वीर्य में कैडमियम के स्तर को बढ़ाकर शुक्राणुओं की संख्या को कम करने लगता है। क्योंकि कैडमियम डी.एन.ए. को क्षति पहुँचाता है जिससे शुक्राणुओं के संख्या में कमी आ जाती है।
वैसे तो पुरूषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी बढ़ती आयु के साथ कम होने लगती हैं। परंतु जब आप युवावस्था के समय ही इस समस्या से जकड़े है तो आपका घर बिखराव की कगार पर खड़ा हो जाता है। क्योकि पत्नी भी संभोग के दौरान संतुष्ट नहीं रहती है साथ ही बच्चे के जन्म लेने में भी समस्या बनी रहती है और काफी हद तक शरीर में कमजोरी होने के कारण सेक्स आपके जीवन को प्रभावित करता है। इससे प्रजनन क्षमता के स्तर में कमी, कामेच्छा में कमी, शारीरिक कमी जैसी समस्याये उत्पन्न होती है। इन सब समस्याओं से लड़ने का एक ही उपाय है और वो है नियमित रूप से व्यायाम जो आपके शरीर को मजबूत बनाने के साथ आपके शुक्राणु को बढ़ाने में भी विशेष भूमिका निभाता है।
काफी शोधों के अनुसार पाया गया कि एक से अधिक बार शराब पीने से पुरुषों के शुक्राणुओं की क्षमता में कमी होने के साथ सेक्स इच्छा में कमी आ जाती है। साथ ही पुरूषों के सेक्स हार्मोन टेस्टास्टरोन के स्तर को खत्म करने लगता है इसलिए सेक्स जीवन को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए शराब के सेवन के आदत में सुधार लाना आवश्यक होता है।
सेक्स के दौरान अपनी उत्तेजना का बढ़ाने के लिये आप कई प्रकार की औषधियों का सहारा लेते है। जो बाद में आपकी सेक्स क्रिया को प्रभावित करने लगता है। जिससे पुरूषों के लिंग में रक्त का संचार सही तरीके से नही हो पाता और शुक्राणुओं के उत्पादन का स्तर गिरने से शुक्राणुओं की संख्या में कमी आने लगती है। इसलिए आप थोड़े से मनोरंजन के लिये इन औषधियों के सेवन से बचें। संभोग करने के दौरान सुरक्षा का ध्यान नहीं रखने पर यौन संचारित रोग (STD) होने की संभावना बढ़ जाती है जो शुक्राणुओं के डी.एन.ए. और संख्या को पहले प्रभावित करता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मन को स्वस्थ रखना बहुत आवश्यक होता है। यदि आप सर्वदा तनावग्रस्त रहेगें तो आपका पूरी शरीर इसके प्रभाव में आयेगा जिससे शरीर के सारे अंगों की गतिविधियों में परिवर्तन होने के साथ आपके सेक्स जीवन में भी इसके परिणाम देखने को मिल सकते है। तनाव के समय शरीर का रक्त संचार बहुत तीव्र गति से काम करता है और यही रक्त में उच्च स्तर के होने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगते है और शुक्राणुओं की संख्या घटने लगती है जो आपके जीवन को नष्ट कर देती है।
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