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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

How diagnose and treat kidney problems in hindi

यदि आपकी किडनी खतरे में है तो - ये देगी आपको ये संकेत जिनको जानकार आप अलर्ट हो जाइये -

किडनी जो शरीर को De toxification और साफ़ सफाई के लिए इश्वर ने हमारे शरीर में दी है, हमारी गलत आदतों या शुगर या ब्लड प्रेशर की  medicine या Genetic कारणों से खराब हो जाती है, मगर कई बार हमको इसका पता बहुत देर बाद पता चलता है. ये पोस्ट डालने का अर्थ आपको डराने का नहीं, बस यही है के आप समय से इस बीमारी को पहचान लें और इसका शुरू में इलाज बहुत आसान है, तो आइये जानते हैं इसके खराब के Symptoms और इसको सही करने की विधि भी जानेंगे.

किडनी फेल की होने की अंतिम स्थिति से तात्पर्य किडनी के पूरी तरह काम न कर पाने से है। यदि कोई व्यक्ति किडनी फेल होने की अंतिम स्थिति में होता है तो उसके लिए कुछ नहीं किया जा सकता। इस अवस्था में Dialysis ही एकमात्र हल होता है. Dialysis के जरिये शरीर का अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकाला जाता है.

अत: यह महत्वपूर्ण है कि जब भी आपको किडनी से संबंधित कोई समस्या आए तो आप तुरंत किसी योग्य व पेशेवर चिकित्सक की सलाह लें। यहाँ किडनी फेल होने की चेतावनी से संबंधित लक्षणों के बारे में बताया गया है।

अपने तथा अपने प्रिय लोगों के स्वाथ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है अत: इन लक्षणों के बारे में जानें।

मुँह से बदबू निकलना और स्वाद भी खराब हो जाना – अगर दूसरे लक्षण नजर में नहीं भी आ रहे हैं तो यह लक्षण साफ नजर आता है। किडनी के खराब होने के कारण रक्त में यूरिया का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण मुँह से बदबू निकलने लगता है और जीभ का स्वाद भी बिगड़ जाता है।
एडेमा: – एडेमा के पहले चरण में केवल पैरों में सूजन आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी शरीर से पानी बाहर नहीं निकाल पाती। इससे शरीर में पानी भर जाने की समस्या हो जाती है।
एनीमिया: – किडनी का एक मुख्य काम शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को व्यवस्थित बनाये रखना है। दुर्भाग्य से जब किडनी फेल होना शुरू होती है तो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में कमी आ जाती है जिसके कारण एनीमिया होता है।
हेमेट्युरिया: – जब किडनी फेल होना प्रारंभ होती है तो आपके मूत्र में रक्त के लाल थक्के दिखाई देते हैं। किडनी की समस्या होने पर विभिन्न लोगों को विभिन्न तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे मूड स्विंग्स (मूड में बदलाव), भ्रम और मतिभ्रम।
पीठ में तेज़ दर्द: – यह दर्द बहुत अधिक तीव्र होता है तथा शरीर के एक ओर के पिछले हिस्से में होता है। यह दर्द पेट में नीचे की ओर होता हुआ कमर और अंडकोष तक भी पहुँच सकता है।
मूत्र त्याग में कमी: – मूत्रत्याग के समय मूत्र की कम मात्रा का आना हर बार किडनी की समस्या की ओर संकेत नहीं करता परन्तु यदि आपको ऐसा लगता है कि शरीर से निकलने वाले इस तरल पदार्थ की मात्रा में कमी आई है तो आपको चिकित्सीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
झाग (foam) जैसा मूत्र – मूत्र त्याग करने के बाद जब उसमें झाग जैसा पैदा होने लगता है तब यह किडनी के खराब होने के प्रथम लक्षणों के संकेत होते हैं। डॉ. के अनुसार यह शरीर से प्रोटीन के निकलने के कारण होता है जो किडनी के बीमारी के दूसरे लक्षणों में शामिल होता है।
भूख कम लगना – शरीर में अवांछित पदार्थ ज़रूरत से ज़्यादा जम जाने के कारण यह लक्षण महसूस होने लगता है। दीपा जयराम के अनुसार किडनी के बीमारी के कारण दूसरे लक्षण समझ में आए न आए यह लक्षण ज़रूर नजर आता है। इसलिए जैसे ही यह लक्षण समझ में आए तुरन्त डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।
साँस लेने में असुविधा – जब किडनी की अवस्था खराब होने लगती है तो लंग्स में फ्लूइड जमने लगता है जिसके कारण साँस लेने में असुविधा होने लगती है। अनीमीआ के कारण शरीर में ऑक्सिजन की कमी हो जाती है जिसके कारण भी साँस लेने में असुविधा होने लगती है।
उद्वेग: – जब किडनी फेल होना प्रारंभ होती है तो शरीर के कुछ हिस्सों में उद्वेग, कंपन या अनैच्छिक हलचल होने लगती है।
मूत्र में असामान्य और गंदी बदबू आना: – ऐसे व्यक्ति जिनकी किडनी फेल हो रही हो उनके मूत्र से मीठी और तीख़ी गंध आती है।
त्वचा में रैशेज़ और खुजली – वैसे तो यह लक्षण कई तरह से बीमारियों के लक्षण होते हैं लेकिन किडनी के खराब होने पर शरीर में विषाक्त पदार्थों के जम जाने के कारण शरीर के त्वचा के ऊपर रैशेज़ और खुजली निकलने लगते हैं।
मतली और उल्टी – शरीर में विषाक्त पदार्थों का स्तर बढ़ जाने के कारण मतली और उल्टी होने लगता है।
मल में रक्त आना – मल में रक्त आना भी कभी कभी किडनी फेल होने की ओर संकेत करता है।
ऐसे कोई संकेत मिले तो आप अपना GFR टेस्ट ज़रूर करवा लें. इस टेस्ट को आप नीचे बताई गयी रिपोर्ट से समझे.


समझे Kidney GFR को
जब GFR 15 से कम हो जाए तो ही डॉक्टर Dialysis के लिए बोलता है, अगर ये इस से बढ़ी हो तो डॉक्टर इंतजार करेगा, मगर आज कल डॉक्टर सिर्फ Creatinine टेस्ट करवा कर ही बोल देते हैं के Dialysis करवाओ, इसकी ज़रूरत तभी पड़ती है, जब आपका GFR लेवल कम हो जाए. अन्यथा आपको इसकी ज़रूरत नहीं.

अभी जान लीजिये इसके लिए कुछ उपचार.
सबसे पहले तो जिस रोगी को ये बीमारी है उसकी चाय और चीनी बिलकुल बंद कर दो. ये बिलकुल ज़हर के समान है, सुबह लैट्रीन जाने से पहले एक ग्लास पानी में निम्बू निचोड़ कर उसमे आधा चम्मच मीठा सोडा मिला कर पियो. अगर आपको पोटैशियम बढ़ा हुआ हो तो निम्बू मत डालिए इसमें सिर्फ मीठा सोडा मिला कर पीजिये, इसके बाद लैट्रीन जाने के बाद गोखरू कांटे वाला काढ़ा पीजिये, इसमें 50 ग्राम छोटा गोखरू डालिए, 10 ग्राम पुनर्नवा, और 10 ग्राम कासनी के बीज डालकर इसको 500 ml पानी में धीमी आंच पर 100 ml रहने तक पकाएं. इसको 50 ml सुबह पीजिये, इसके एक घंटे के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है. और यही काढ़ा शाम को सोने से एक घंटे पहले लें. और तब भी एक घंटे के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है.

और कई लोगों को पेशाब की कोई समस्या नहीं होती मगर फिर भी शरीर में सूजन होती है, इसका कारण खून की कमी भी हो सकती है. इसलिए घबराएं नहीं, बस अपनी जांच करवा लीजिये.

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