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रविवार, 25 सितंबर 2022

Why Protein comes in urine? । पेशाब में प्रोटीन क्यों आता है?। What is proteinuria or Albumineria in hindi

एल्ब्यूमिन रक्त में उपस्थित एक सबसे महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है । यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे पदार्थ रक्त की सफाई करते समय शरीर से मूत्र के द्वारा बाहर निकाल दिए जाते हैं और एल्ब्यूमिन नहीं निकाला जाता। 
परंतु, जब मूत्र में एल्ब्यूमिन आ जाए तो यह किडनी की किसी विशेष रोग की ओर संकेत देता है। 
मूत्र प्रोटीन और यूरिन में एल्ब्यूमिन आना दोनों समान रूप में उपयोग किए जाते हैं। 
एल्ब्यूमिन सबसे साधारण प्रोटीन है जो किडनी की कार्यक्षमता में कमी आ जाने से या किडनी में कोई क्षति हो जाने से मूत्र में आने लगता है।
एल्ब्यूमिन लीवर में बनने वाला एक साधारण प्रोटीन है, जो रक्त प्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में जाता है। 
एल्ब्यूमिन शरीर में नए उतकों का विकास करने, कोशिकाओं की मरम्मत करने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने का कार्य करता है। एल्ब्यूमिन रक्त वाहिकाओं में रक्त का संतुलन बनाए रखने और रक्त-चाप बनाए रखने का कार्य करता है।
एल्ब्यूमिन एक प्रकार का प्रोटीन है जो सामान्य रूप से रक्त में पाया जाता है। यह वह प्रोटीन है जो हमारे शरीर में मांसपेशियों के निर्माण, ऊतकों की मरम्मत और संक्रमणों से लड़ने में सहायता करता है। एल्ब्यूमिन मुख्य रूप से रक्त में होना चाहिए यदि यह मूत्र में आ जाता है तो यह किडनी की रोगों का कारण बन जाता है। मूत्र में एल्ब्यूमिन आने वाले इस संकेत को “एल्ब्यूमिन्यूरिया (albuminuria)” या “प्रोटीन्यूरिया (proteinuria)” कहते है।
मूत्र में प्रोटीन आने का कारण या लक्षण या संकेत कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे -
हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के रोगी इसका सरलता से हो जाते हैं शिकार।
लो ब्लड प्रेशर, फीवर, किडनी स्टोन भी कारण बनते हैं मूत्र में प्रोटीन आने के।
 दैनिक जीवन में कम मात्रा में जल का सेवन भी मूत्र में प्रोटीन आने का एक कारण हैं।
मानसिक तनाव के कारण भी मूत्र में प्रोटीन आने की संभावना हो सकती है।
किसी - किसी को तो केमिकल्स युक्त औषधियों का सेवन भी मूत्र में प्रोटीन आने का कारण बनते हैं।
मूत्र में झाग का आना संकेत हो सकता है मूत्र में प्रोटीन आने का ।
शरीर के विभिन्न भागों जैसे - फेस या चेहरे, हाथ और पैर इत्यादि में सूजन का होना।
सीढ़ियों के चढ़ने पर या दौड़ने पर या चलने पर सांसों का फूलना या हांफना भी मूत्र में प्रोटीन आने के संकेत हो सकते हैं।
पैरों में सुन्नपन या पैर को लटका कर बैठने पर पैरों में सूजन का होना इसके सांकेतिक लक्षण हो सकते हैं।
शीघ्र - शीघ्र मूत्र त्याग करने की स्तिथि भी मूत्र में प्रोटीन आने के लक्षण हो सकते हैं।
इस स्तिथि में मूत्र में पीलापन या जलन के लक्षण भी हो सकते हैं।
शक्ति की कमी और थकान का अत्यधिक अनुभव होना इसके सामान्य लक्षणों में आते हैं।
कमर में दोनों ओर दर्द का होना।
मूत्र में रक्त का आना।
शरीर में खुजली का होना।
जी का मिचलाना या उल्टी का आना भी इसका संकेत या लक्षण हो सकता है।
क्या है इसका निदान / डायग्नोसिस ?
मूत्र की जांच कराएं।
किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) या जिसे (RFT) अर्थात् रिनल फंक्शन टेस्ट भी कहते हैं, इसे कराएं।
USG - KUB टेस्ट कराएं।
किसी - किसी मामले में तो आपको मूत्र में प्रोटीन रिसाव के सटीक कारण का पता लगाने के लिए किडनी बायोप्सी भी करने की परामर्श आपको आपके चिकित्सक दे सकते हैं।
यह आपके रोग की स्तिथि और परिस्थिति पर निर्भर करता है,
जिसमें किडनी के कुछ ऊतकों को एक सुई का उपयोग करके बाहर निकाल लिया जाता है और फिर उन ऊतकों को एक माइक्रोस्कोप के नीचे रख के परीक्षण किया जाता है। 
यदि आपको विशेषज्ञ परीक्षणों के बाद आपके लिए कोई चिकित्सा या उपचार निश्चित करता है तो उसका पालन करें।
किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंग के रोग के लिए विशेषज्ञों से ही परामर्श लें। सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करें। 
यदि इसका समय पर सही चिकित्सा या उपचार न लिया जाए तो भविष्य में जाकर किडनी विफल होने की आशंका रहती है।
इन लक्षणों को इग्नोर नही करें, यथाशीघ्र इसका समाधान कराएं नही तो झेलने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम।
ऐसी स्तिथि में किडनी के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। हो सकता है कि क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ जाय या मूत्र में यूरिया की मात्र बढ़ जाए और ऐसी स्तिथि में शरीर में रक्त की कमी भी हो सकती है, जिससे कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अतः इन सभी लक्षणों का पूर्ण रूपेण उपचार अतिआवश्यक है नही तो संभव है कि डॉक्टर आपको डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कह दें।

आइए जानते हैं , डाइट या भोजन में क्या लें -
अल्काइन डाइट लेना लाभदायक है।
हाइड्रेशन मेंटेन रखें अर्थात् जल का भरपूर सेवन करें।
फाइबर युक्त भोजन लें।
बिना रिफाइन के भात या रोटी खाएं।
मूंग दाल, अरहर दाल, खिचड़ी, दलिया, पोहा और उपमा का सेवन लाभदायक है।
ताजे फल, हरी सब्जियां और सलाद का सेवन उत्तम है।

डाइट या भोजन में क्या नहीं लें -
एसिडिक डाइट लेने से बचें।
किडनी स्टोन से पीड़ित रोगी ऑक्जेलेट रिच फूड जैसे - टमाटर, पालक, चॉकलेट इत्यादि लेने से बचें।
डिहाइड्रेशन नही होने दें।
कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ या डिप फ्राइड डाइट लेने से बचें।
मिर्च, मशाला, तली - भुनी खाद्य पदार्थ से बचें।
दही या खट्टी चीजें नहीं खाएं।
जंक फूड्स या प्रोसेस्ड फूड्स नही खाना ही अच्छा रहता है।
नमक और चीनी का सेवन सीमित मात्रा में करें।
अनावश्यक या अत्यधिक पेन किलर खाने से बचें।
स्मोकिंग या धूम्रपान करने से बचें।

शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

Lal Bhindi l Kadhi Lalima Bhindi l lal bhindi

हम सभी लोग प्रायः हरी भिंडी ही सेवन करते हैं, क्योंकि यह मार्केट में प्रचुरता से उपलब्ध रहता है। परंतु, क्या आपने कभी लाल भिंडी (Red Lady Finger) देखी या खाई है ? 
क्या आप लाल भिंडी (Red Lady Finger) के बारे में जानते हैं ? जो हरी भिंडी से अधिक पौष्टिक है।

आइए जानते हैं कितनी लाभदायक है - लाल भिंडी (Red Lady Finger)

एंटी ऑक्सीडेंट (Anti - oxident) आयरन (iron) और कैल्शियम (calcium) से है भरपूर है - काशी लालिमा लाल भिंडी (kashi lalima lal bhindi)

घेंघा रोग (Goitre Disease) तथा एनीमिया (Anaemia Disease) जैसे रोगों को दूर करेगी - काशी लालिमा लाल भिंडी (kashi lalima lal bhindi)

हरी भिंडी की तुलना में, लाल भिंडी में अधिक पोषक तत्व ( Neutrisonal elements) पाए जाते हैं जो आपके स्वास्थ्य (Health) को पुष्ट (strong) रखने में सहायक (helpful) होते हैं।

लाल भिंडी में आयरन (iron), कैल्शियम (calcium), मैग्नीशियम (Magnesium) प्रचुर मात्रा (rich source) में मिलता है। इससे शारीरिक और मानसिक विकास (Physical & Mental Health) के लिए आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं जो कुपोषण (Malnutrition) से भी लड़ने में सहायक हैं। 

लाल भिंडी (red Lady finger) से विटामिन सी (Vitamin C) विटामिन ए (Vitamin A) फोलेटिन (Folitine / Follic Acid) भी प्राप्त होता है। साथ ही इसमें न तो फैट / वसा (Fat) मिलता है और न ही कोलेस्ट्रॉल (cholestrol) या कैलोरी (calorie)

इतना ही नहीं, यह भिंडी फाइबर (fiber) की भी एक अच्छा स्रोत (rich source) है।

अगर आपको अपने हृदय स्‍वास्‍थ्‍य ( Heart health) हार्ट हेल्‍थ की चिंता है तो सर्वदा हेल्‍दी डाइट (healthy diet) का चुनाव करें। 
आपकी प्‍लेट को हेल्‍दी बनाने के लिए अब भारतीय वैज्ञानिकों (indian scientists) ने एक और स्वास्थ्यवर्धक सब्‍जी विकसित( devloped healthy vegetables) की है। 

लाल रंग (red colour) की यह विशेष भिंडी (Red lady finger) हार्ट हेल्‍थ (heart health) के लिए बहुत महत्वपूर्ण (very important) बताई जा रही है। इन दिनों काशी (kadhi) यानी वाराणसी (Varanasi) में उगाई गई लाल रंग (red colour) की भिंडी काफी चर्चा में है। 

इसकी विशेषता (characteristics) है इसका रंग (red colour) इसी कारण इसे वैज्ञानिकों (scientists) ने काशी लालिमा’ भिंडी (kashi lalima bhindi) नाम दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह भिंडी केवल दिखने में ही नहीं स्वाद और पोषक तत्वों में भी विशेष (special) है। हार्ट हेल्थ (heart health) और शुगर / चीनी / डायबिटीज (Sugar/Diabetes) में इसे अत्यंत लाभदायक ( very useful) बताया जा रहा है। 
भिंडी यानी काशी लालिमा (kashi lalima bhindi) हरी भिंडी (Green bhindi) की तुलना (comparison) में इस लाल रंग की भिंडी में कुछ विशेष पोषक तत्व हैं। इसमें आयरन (iron) की मात्रा अधिक है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम(calcium) विटामिन बी 9 (Vitamin B9) भी उपस्थित है। इसे विकसित (Develop) करने वाले विशेषज्ञों (specialist) की मानें तो इसमें कुछ विशेष एंटी ऑक्सीडेंट तत्व (Anti - Oxident Elements) हैं, जिसके कारण यह गर्भवती महिलाओं के लिए (Very good for Pregnant women) अच्छी मानी जा रही है।

हार्ट हेल्थ (heart health) में है लाभदायक (useful) काशी लालिमा यानी लाल रंग की भिंडी (kashi lalima bhindi/red lady finger) में उपस्थित आयरन (iron) कैल्शियम (calcium) और एंटी ऑक्सीतडेंट तत्व (Anti - Oxident Elements) इसे हार्ट हेल्थ (Heart Health) के लिए उपयोगी (Useful) बना रहे हैं। इसके सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉंल (Bad Cholesterol) को रोकने में सहायता प्राप्त होगी। 

अभी तक इस तरह की भिंडी केवल यूरोपीय देशों में ही उगाई जा रही थी। पर अब इसकी खेती भारत में काशी / बनारस के वैज्ञानिकों के सहयोग से भी हो रही है।
‘काशी लालिमा’ नाम की इस भिन्डी को विकसित करने में 8-10 वर्षों की कड़ी मेहनत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने की है। वास्तव में लाल भिंडी वैज्ञानिकों ने चयन विधि का प्रयोग करके इस प्रजाति को और विकसित किया। इस भिंडी में सामान्य हरी सब्जी यहां तक की भिंडी में पाए जाने वाले क्लोरोफिल(Chlorophyll) की जगह एंथोसाइनिन (Anthocyanin) की अत्याधिक मात्रा होती है जो इसके लाल रंग का कारक है।
 इस लाल भिन्डी को उगाना सामान्य हरी भिंडी की ही तरह सरल होता है और इसकी लागत भी सामान्य हरी भिन्डी से थोड़ी ही अधिक होती है, इतना ही नहीं इसके लाल रंग के कारण इसमें एंटीऑक्स‍िडेंट कहीं अधिक है. वैज्ञानिक इसे पकाकर खाने के साथ - साथ सलाद के रूप में खाने की परामर्श देते हैं। 

आज घर घर डायबिटीज़ और थायराइड की समस्या से लोग ग्रसित हैं, और लोग अपनी स्वास्थ्य के लिए हरी सब्ज़ियों का सेवन अत्यधिक करते हैं परंतु, अब ऐसी संजीवनी बूटी मिल गई है, जो आपको स्वास्थ्य नहीं होने देगी, जी हां, लाल भिंडी या कहें ‘काशी लालिमा’ न केवल स्वादिष्ट बल्कि हरी भिंडी से कहीं अधिक स्वास्थ्यवर्धक है। यह कई प्रकार के जटिल रोगों से लड़ने में सहायक है।
संस्थान के निदेशक की मानें तो ये भिंडी अपने आप में बहुत ज्यादा चमत्कारी है विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए जिनके शरीर में फॉल‍िक अम्ल की कमी के चलते बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता है। वह फॉल‍िक अम्ल भी इस काशी लालिमा भिंडी में पाया जाता है. इतना ही नहीं इस भिंडी में पाए जाने वाले तत्व लाइफ स्टाइल डिजीज जैसे हृदय संबंधी रोगों, मोटापा और डायब‍िटीज को भी नियंत्रित करती है.

इसमें क्रूड फाइबर होता है। इससे शुगर भी नियंत्रित होता है। इसमें बी कम्पलेक्स भी प्रचुर मात्रा में होती है। लाल रंग की इस भिंडी को उत्तर प्रदेश स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) में वर्षों के शोध के बाद विकसित किया है।

इसमें विटामिन बी-9 होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है। इसमें फॉलेट नामक पोषक तत्व होता है, जो भ्रूण के मस्तिष्क विकास में अहम भूमिका निभाता है।

कुमकुम भिंडी जो कि शरीर से बुरा कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। वहीं यह हाई ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है।

आपको बता दें कि अगर आप इस लाल भिंडी को पकाएंगे, तो इसका रंग लाल नहीं होगा. पकने के बाद इसका लाल रंग समाप्त हो जाता है. वहीं इसके अंदर के दाने (फलियां) वैसे की वैसे ही रहती हैं।

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मंगलवार, 13 सितंबर 2022

Best food for diabetes control । डायबिटीज में क्या खाना चाहिए ?

डायबिटीज में उपयोगी सुपर फूड्स डायबिटीज रोग मनुष्य के साथ जीवन भर रहता है। इस स्थिति में हमारा शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर रहा होता है या उत्पादित इंसुलिन का रिसपॉन्ड नहीं दे पाता है।


वर्तमान समय में डायबिटीज एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जो भारत में बहुत सालों पहले पैर पसार चुकी है। ये समस्या जेनेटिक भी हो सकती है, परंतु, अधिकतर मामलों में ये खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी फूड हैबिट्स के कारण हो सकता है.। मधुमेह रोग कई अन्य रोगों को भी जन्म देती है जिसमें किडनी डिजीज, हार्ट डिजीज, हाई बीपी और स्ट्रोक शामिल है।

डायबिटीज दो तरह की होती है टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज। 
टाइप-1 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करना बंद कर देता है जबकि टाइप-2 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन तो बनाता है परंतु, कम बनाता है। 

इंसुलिन एक हार्मोन है जो पाचन ग्रंथी से बनता है जो भोजन को एनर्जी में बदलता है। इंसुलिन का कम उत्पादन होने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए औषधियों का सेवन करना, तनाव से दूर रहना और डाइट को कंट्रोल करना अत्यंत आवश्यक है। डाइट में कुछ ऐसे फूड्स हैं, जिनका सेवन करने से तीव्रता से शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।
प्रातः काल खाली पेट सामान्य ब्लड शुगर लेवल 70-100 mg/dl होना चाहिए। यदि 100-125mg/dl शुगर लेवल हो जाए तो यह हानिकारक हो सकता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को चाहिए कि वो शुगर को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखें।
मधुमेह के होने के पहचान के रूप में कुछ सामान्य लक्षण हैं, जिन लक्षणों में शामिल हैं:

भूख अधिक लगना
प्यास अधिक लगना
वजन घटना
जल्दी-जल्दी पेशाब आना
धुंधली दृष्टि होना
अत्यधिक थकान महसूस होना
चोट लगने पर घाव जल्दी ठीक न होना

टाइप-2 डायबिटीज के रोगी हैं तो मिठाई और सोडा जैसे मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बना कर रहा करें। ये फूड ना सिर्फ शुगर को बढ़ाते हैं बल्कि शारीरिक भार को बढ़ाने में भी मुख्य भूमिका निभाते हैं।
फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, परंतु फलों का जूस शुगर के रोगियों की समस्या को बढ़ा सकता है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए फलों के जूस का सेवन नही करें।

फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट से बचने का प्रयास करें और लो-फैट फूड्स का सेवन करें।
टाइप 2 डायबिटीज के रोगी हाई फैट मांस या कहिए मांसाहार का सेवन करने से बचें।

डिब्बाबंद स्नैक्स और बेक्ड फूड का सीमित सेवन करें ये शुगर को बढ़ा सकते हैं।

ऑयली, ब्रेड फ्राइड फूड्स का सेवन करने से बचना आपके लिए विशेष लाभदायक है।
शराब और अल्कोहल का सेवन करने से बचना अपनी आयु को बढ़ाना ही है।
टाइप-2 डायबिटीज के रोगी डाइट में फल-सब्जियों और साबुत अनाज को शामिल करें। 

कम वसा वाले डेयरी प्रोड्क्ट का सेवन करें। 

गुड फैट के लिए नट्स, एवोकाडो और जैतून का तेल डाइट में शामिल करें। 

डायबिटीज के रोगियों के लिए जितना आवश्यक शुगर को कंट्रोल करने वाले फूड्स का चयन करना है उतना ही आवश्यक शुगर बढ़ाने वाले फूड्स से दूरी बनाए रखना भी है। 

 हेल्दी डाइट ना मात्र शुगर को कंट्रोल करेगी बल्कि आपका 10-15 किलो तक शरीर का भर भी कम करेगी।

डायबिटीज रोगियों को नियमित अंतराल में भोजन करते रहना चाहिए ताकि अचानक ब्लड शुगर में कमी न हो।

डायबिटिक रोगी को फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रातः काल के जलपान और दोपहर के भोजन के बीच जो समय होता है, जिसको प्री लंच कहते हैं उस समय प्रयास करें कि हल्का-फुल्का कुछ खाएं।

 इसमें आपको अपने भोजन को डिवाइड करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आपको अपनी डाइट में प्रतिदिन कितनी कैलोरी लेनी है. क्योंकि, डायबेटिक रोगियों के लिए अधिक कैलोरी शुगर और शरीर का भार बढ़ाता है।

कोई भी लोकल या ऋतु अनुसार फल जो फाइबर में उच्च और ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम है, आपके ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने में सहायता कर सकता है.

प्रायः जूस में सब्जी या फल की फाइबर सामग्री कम हो जाती है, इसलिए इन्हें ऐसे ही खाना अधिक लाभप्रद है. कोई भी फल या सब्जी सेवन करने से पूर्व यह सुनिश्चित करें कि यह ताजा, घर का बना और नैचुरल हो. 
आप चाहे तो जूस के रूप में ताजे पालक के पत्तों के साथ पत्तागोभी के पत्तों को एक साथ मिलाकर थोड़ा सा पानी डालकर ब्लेंड करके ऐसे ही पीने की प्रयास कर सकते हैं.

बादाम, कद्दू के बीज, काजू, तिल के बीज, अलसी का बीज और अखरोट को एक साथ मिलाकर आप एक होममेड नट-ट्रेल तैयार कर सकते हैं. आप इसको खा सकते हैं. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसका सेवन सीमित मात्रा में करें.

टमाटर और धनिया का पत्ता लो कैलोरी वाला आहार है जो आपके शरीर में स्फूर्ति का संचार कर सकता है. आप इस सिम्पल से सैलेड को तब भी बना सकते हैं, टमाटर, नींबू , काली मिर्च, गाजर, खीरा इत्यादि एक लो-कार्ब स्नैक का बहुत ही अच्छा विकल्प है. 
फलों में तरबूज और अंगूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) अधिक होता है । अतः इसके सेवन से बचें।

डायबिटीज रोगी को जटिलताओं से बचने के लिए फलों का सेवन करते समय सावधानी की आवश्यकता होती है. 

जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें विशेष रूप से कार्बोहाइड्रेट काउंट और उनके मील साइज पर नियंत्रण रखना अत्यावश्यक है.
ध्यान रखने वाली बात ये है कि डायबिटीज रोगियों को ऐसे फलों का सेवन करना चाहिए जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक हो.

डायबिटीज का कोई परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है और इसे ममत्र एक हेल्दी डाइट के माध्यम से ही कंट्रोल किया जा सकता है। 

मधुमेह या डायबिटीज एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें पीड़ित का ब्लड शुगर या ब्लड ग्लूकोज लेबल बढ़ता रहता है। 
पास्ता का सेवन आपके ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। इससे मोटापा बढ़ने का भी संभावना होता है।
आलू में कुल कैलोरी का 98% कार्बोहाइड्रेट के रूप में आता है। इसमें हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है और यह डायबिटीज के रोगियों के लिए उचित नहीं है।

मैदे से बनी कोई भी चीजों का सेवन डायबिटीज के रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है। मैदा का अधिक सेवन कब्ज उत्पन्न कर सकता है। मैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है। यह डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित रोगियों के लिए ठीक नहीं है।

जो लोग चावल खाते हैं उनमें टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का संभावना बढ़ सकता है।
चावल में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जिसका अर्थ है कि यह ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है।
सफेद ब्रेड सफेद आटे से बनी होती है, जोकि रिफाइंड स्टार्च से भरी होती है। यह चीजें चीनी की तरह काम करती है और बहुत जल्दी पच जाती है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि जब इसे खाया जाता है, तो उनमें फाइबर की कमी होती है।

डायबिटीज को मात देना है तो औषधियों से अधिक अपनी खान पान और डाइट की भूमिका पर ध्यान देना चाहिए. 
डायबिटीज के रोगियों को अपने दैनिक आहार में कई सुपरफूड्स को शामिल करने चाहिए, इसका सबसे बड़ा कारण है कि अगर ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक बढ़ जाए तो यह शरीर के कई प्रमुख अंगों को क्षतिग्रस्त कर गंभीर रोगों का भी शिकार बना सकता है. 

ऐसे में यह आवश्यक है कि डायबिटीज के रोगी अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखें और स्वस्थ बने रहने के लिए कुछ प्रमुख सुपरफूड्स को अपने आहार में सामिल करें, जो डायबिटीज के रोगियों के लिए अत्यधिक लाभदायक है.

इन्ही सुपर फूड्स में एक प्रमुख है दही।

डायबिटीज के घटक दुष्प्रभावों को कम करने में दही भी लाभदायक सिद्ध हो सकता है. आप दही खाएं या इसका छाछ बना कर पीएं, इससे पेट भी ठंडा रहेगा और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता मिलेगी.
इन्ही सुपर फूड्स में एक प्रमुख है संतरा

 विटामिन सी से भरे संतरे को खाने से इम्यूनिटी भी स्ट्रांग होती है और संतरा खाने से मधुमेह का रोकथाम में सहायता मिल सकता है. संतरा और आंवले जैसे खट्टे फलों का जीआई स्कोर भी कम है.

डायबिटीज रोगी अपने डाइट में अमरूद को भी शामिल कर सकते हैं।
अमरूद को भी डायबिटीज के रोगियों के लिए सुपर फूड माना जाता है. अमरूद में मिलने वाला फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है और ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकता है.
डायबिटीज रोगी पालक को आपने भोजन में प्रमुखता से स्थान दें क्योंकि में फाइबर, फोलेट, कैल्शियम और आयरन का भंडार होता है. पालक टाइप -1 और टाइप -2 दोनों प्रकार के मधुमेह रोगियों के लिए आदर्श माना जाता है.

 प्रतिदिन अपनी डाइट में पालक को शामिल कर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है.

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि डायबिटीज रोगी अपनी डाइट में रागी को शामिल करें तो उन्हे अपने शरीर के लिए आवश्यक बहुत सारे पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, पॉलीफेनोल, अमीनो एसिड, आयरन और विटामिन बी प्रचुर मात्रा में प्राप्त होगा । 

रागी भी शुगर कंट्रोल करने में अत्यंत लाभदायक है. डायबिटीज के रोगियों के लिए चावल और गेहूं के विकल्प के तौर पर रागी खाना अधिक लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
डायबिटीज में अधिक मीठी चीजों के सेवन हानिकारक है।
 चीनी या इससे बनी मीठी चीजों में बैड कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं. साथ ही चीनी में पौष्टिक तत्व भी नहीं होता है. इसके अधिक सेवन से आपका शुगर लेवल भी बढ़ सकता है. साथ ही कई अन्य रोगों को भी जन्म दे सकता है
हर हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती है, परंतु, ब्रोकली को सुपरफूड से कम नहीं समझा जाता. अगर इसे रेगुलर खाएंगे तो ब्लड शुगर लेवल और बीपी कंट्रोल में रहेगा और साथ ही इम्यूनिटी भी बूस्ट होगी.
हमें अपनी डेली डाइट में होल ग्रेन यानी साबुत अनाज से बनी चीजों को अवश्य शामिल करना चाहिए क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी हैं. डायबिटीज के रोगियों को अगर अपना ब्लड शुगर लेवल मेंटेन रखना है तो पॉलिश्ड राइस के स्थान पर अल्प मात्रा में ब्राउन राइज और नॉर्मल गेंहूं के आटे की जगह मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाना अधिक प्रभावी सिद्ध होगा।
करेला जिसे खाने से अधिकांश लोग कतराते ही हैं। करेले का कड़वा स्वाद इसकी पहचान है और इसका यही स्वाद ही इसे घरेलू उपायों में एक औषधि के रूप में महत्व रखता है। डायबिटीज या मधुमेह के रोगियों को करेला खाना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से इंसुलिन (insulin) सक्रिय होता है। 
करेले में पाया जाने वाला पी-इंसुलिन (Polypeptide-p or p-insulin) नामक तत्व डायबिटीज को कंट्रोल करने में सहायता करता है। 

इंसुलिन की सही मात्रा रक्त में शुगर के स्तर को भी ठीक रखने में सहायता करती है।
मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए मेथी दाना का सेवन बहुत लाभकारी माना जाता है क्योंकि, इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) की स्थिति को कंट्रोल करने में सहायता होती है। इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ने से डायबिटीज मैनेजमेंट (Diabetes management) में सहायता होती है।

डायबिटीज की समस्या दिन प्रतिदिन बहुत कॉमन होती जा रही है। खराब लाइफ़स्टाइल, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना, बदलता वातावरण और स्वस्थ भोजन न करने की आदत से कम आयु में ही लोगों को डायबिटीज की समस्या होने लगी है। इसके साथ ही असंतुलित रूप से मीठे का सेवन डायबिटीज का एक सबसे बड़ा कारण हो सकता है। डायबिटीज में सबसे पहले अपने खानपान की आदतों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अन्यथा आपकी समस्या अत्यंत गंभीर हो सकती है।
आंवला ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है। इसमें क्रोमियम पाया जाता है, जो कार्बोहाइड्रेट और मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने में सहायता प्रदान करता हैं। आंवला में उपस्थित विटामिन सी एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है।

आंवला में एंटी हाइपोग्लाइसेमिक और लिपिड लोवरिंग प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। इसलिए डायबिटीज पेशेंट्स इसे प्राकृतिक रूप से प्रयोग में ला सकते हैं।

इसके लिए आंवला का जूस या यदि आप चाहें तो आंवला को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर नमक के साथ भी खा सकते हैं। आंवला कैंडी भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
करी पत्ता ब्लड कोलेस्ट्रॉल और ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में सहायता करता है। 

करी पत्ता में पाया जाने वाला फाइबर भी ब्लड शुगर लेवल को कम करने का काम करता हैं। साथ ही यह शरीर में पर्याप्त इंसुलिन रिलीज करके शुगर लेवल को कम करता है। इसलिए डायबीटिक पेशेंट प्राकृतिक रूप से डायबिटीज को संतुलित रखने के लिए करी पत्ते का सेवन कर सकते हैं।
दाल जैसे खाद्य पदार्थों में तड़का लगाते के लिए करी पत्ता का प्रयोग करें। यदि चाहे तो इसे कच्चा चबा कर सीधा पानी की सहायता से निगल भी सकते हैं।

डायबिटीज के रोगी दूध में हल्दी मिलाकर पिएं। दालचीनी और हल्दी को गर्म पानी में घोलकर भी पी सकती हैं। उसके साथ हल्दी और काली मिर्च का कॉन्बिनेशन भी डायबिटीज को नियंत्रित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

 हल्दी और गोलकी में पाया जानेवाला फाइटोकेमिकल ब्लड वेसल्स को डैमेज होने से बचाते हैं। क्योंकि डैमेज ब्लड वेसल डायबिटीज का एक सबसे बड़ा कारण है।


अगर आपको लगता है कि कार्नफ्लेक्स या मुसली खाकर आप अपना ब्लड शुगर कम कर रहे हैं, तो ये आपकी भूल है। 

अगर कटोरा भर के मुसली या कार्न फ्लेक्स जलपान में खाया जाए तो ये तेजी से ब्लड शुगर को बढ़ाता है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि इन चीजों में कार्ब की मात्रा अत्यधिक और प्रोटीन कम होता है। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण ये तुरंत ब्लड में जाकर ग्लूकोज में बदल जाती हैं।

हर ड्राई फ्रूट शुगर के रोगियों के लिए नही होता। 

ड्राई बेरीज, सूखे आम, खजूर आदि खाने से तेजी से शुगर लेवल बढ़ सकता है। सूखे हुए फलों में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है और इसमें चार गुना तक कार्ब की मात्रा बढ़ जाती है।
डायबिटीज रोगी को भूलकर भी केला, अंगूर, चीकू, लीची और सीताफल का सेवन नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज रोगी को भूलकर भी आम का सेवन नहीं करना चाहिए और अधिक इच्छा है तो बहुत कम मात्रा में करना चाहिए। पके हुए आम से शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ती है इसलिए आम के सेवन से बचना ही लाभदायक है।
 
 सूखे मेवों में विशेषकर किशमिश का सेवन बहुत अधिक नहीं करना चाहिए। किशमिश प्राकृतिक मीठी होती है, जो शुगर रोगियों के लिए हानिकारक हो सकती है।

डायबिटीज भले ही आम रोग हो, परंतु, यह एक गंभीर समस्या है,

 जाे शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करती है। 
 
इसीलिए डायबिटीज के रोगियों के लिए सही डाइट का लेना बहुत आवश्यक है। जिसमें उन्हें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिले। 

न्यूट्रीशन शरीर के विकास और बॉडी फंक्शन के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। न्यूट्रीशन यानी पोषण के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ती है और साथ ही मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे डायबिटीज की समस्या और हार्ट संबंधी समस्याओं के संभावनाओं को कम करने में सहायता मिलती है। 

हमें अपनी डाइट के माध्यम से शरीर को आवश्यक और अनावश्यक दोनों प्रकार के न्यूट्रीशन मिलते हैं। 

अच्छे पोषण तत्व अर्थात् मैक्रोन्यूट्रिएंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से है। 
हमारे शरीर को सुचारू रूप से काम करने के लिए इन्हीं की आवश्यकता पड़ती है। 

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स अर्थात् विटामिन और खनिज लवण।

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स ऐसे पोषक तत्व हैं, जिनकी हमारी बॉडी फंक्शन को अच्छी तरह से कार्य करने के लिए बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। 

वैसे तो कई मैक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं, लेकिन शरीर के लिए जो तीन मुख्य मैक्रोन्यूट्रिएंट होते हैं, वो हैं कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा।

इन्हें बहुत की आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है। उदाहरण के लिए, प्रोटीन शरीर में आवश्यक अमीनो एसिड प्रदान करते हैं, 

जबकि वसा में आवश्यक फैटी एसिड होते हैं।

 मैक्रोन्यूट्रिएंट्स में उपस्थित कैलोरी से हमारी बाॅडी में एनर्जी कनवर्ट होती है। 
 
कार्ब्स एनर्जी का मुख्य सोर्स हैं, परंतु यदि आवश्यक हो तो आपका शरीर ऊर्जा के लिए अन्य मैक्रोन्यूट्रिएंट्स का भी उपयोग कर सकता है। 

आप शरीर के लिए जरूरी मैक्रोन्यूट्रिएंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को प्राप्त करने के लिए डाइट लिस्ट बना सकते हैं। 

कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम और पोटेशियम जैसे मिनरल्स और विटामिन आपके शरीर की लगभग हर प्रक्रिया में आवश्यक होता है। 

परंतु, हमारा मानना है कि कोई भी डायबिटीज के रोगी कोई फूड या जूस का सेवन अपने डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही करें। 

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा का उपयोग सबके लिए अलग हैं।

 आप 100 ग्राम पनीर या बिना पकी 30 ग्राम दाल में प्रोटीन, वसा और कार्ब्स का सरलता से सेवन कर सकते हैं। 
 
एक बात का ध्यान रखें कि खाने में ताजे फलों और सब्जियों का ही उपयोग करें। 
हम आशा करते हैं कि ये जानकारी आपके काम आएगी और आपको मधुमेह जैसी गंभीर रोग से बचने में सहायता करेगी।

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