परंतु, जब मूत्र में एल्ब्यूमिन आ जाए तो यह किडनी की किसी विशेष रोग की ओर संकेत देता है।
मूत्र प्रोटीन और यूरिन में एल्ब्यूमिन आना दोनों समान रूप में उपयोग किए जाते हैं।
एल्ब्यूमिन सबसे साधारण प्रोटीन है जो किडनी की कार्यक्षमता में कमी आ जाने से या किडनी में कोई क्षति हो जाने से मूत्र में आने लगता है।
एल्ब्यूमिन लीवर में बनने वाला एक साधारण प्रोटीन है, जो रक्त प्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में जाता है।
एल्ब्यूमिन शरीर में नए उतकों का विकास करने, कोशिकाओं की मरम्मत करने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने का कार्य करता है। एल्ब्यूमिन रक्त वाहिकाओं में रक्त का संतुलन बनाए रखने और रक्त-चाप बनाए रखने का कार्य करता है।
एल्ब्यूमिन एक प्रकार का प्रोटीन है जो सामान्य रूप से रक्त में पाया जाता है। यह वह प्रोटीन है जो हमारे शरीर में मांसपेशियों के निर्माण, ऊतकों की मरम्मत और संक्रमणों से लड़ने में सहायता करता है। एल्ब्यूमिन मुख्य रूप से रक्त में होना चाहिए यदि यह मूत्र में आ जाता है तो यह किडनी की रोगों का कारण बन जाता है। मूत्र में एल्ब्यूमिन आने वाले इस संकेत को “एल्ब्यूमिन्यूरिया (albuminuria)” या “प्रोटीन्यूरिया (proteinuria)” कहते है।
मूत्र में प्रोटीन आने का कारण या लक्षण या संकेत कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे -
हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के रोगी इसका सरलता से हो जाते हैं शिकार।
लो ब्लड प्रेशर, फीवर, किडनी स्टोन भी कारण बनते हैं मूत्र में प्रोटीन आने के।
दैनिक जीवन में कम मात्रा में जल का सेवन भी मूत्र में प्रोटीन आने का एक कारण हैं।
मानसिक तनाव के कारण भी मूत्र में प्रोटीन आने की संभावना हो सकती है।
किसी - किसी को तो केमिकल्स युक्त औषधियों का सेवन भी मूत्र में प्रोटीन आने का कारण बनते हैं।
मूत्र में झाग का आना संकेत हो सकता है मूत्र में प्रोटीन आने का ।
शरीर के विभिन्न भागों जैसे - फेस या चेहरे, हाथ और पैर इत्यादि में सूजन का होना।
सीढ़ियों के चढ़ने पर या दौड़ने पर या चलने पर सांसों का फूलना या हांफना भी मूत्र में प्रोटीन आने के संकेत हो सकते हैं।
पैरों में सुन्नपन या पैर को लटका कर बैठने पर पैरों में सूजन का होना इसके सांकेतिक लक्षण हो सकते हैं।
शीघ्र - शीघ्र मूत्र त्याग करने की स्तिथि भी मूत्र में प्रोटीन आने के लक्षण हो सकते हैं।
इस स्तिथि में मूत्र में पीलापन या जलन के लक्षण भी हो सकते हैं।
शक्ति की कमी और थकान का अत्यधिक अनुभव होना इसके सामान्य लक्षणों में आते हैं।
कमर में दोनों ओर दर्द का होना।
मूत्र में रक्त का आना।
शरीर में खुजली का होना।
जी का मिचलाना या उल्टी का आना भी इसका संकेत या लक्षण हो सकता है।
क्या है इसका निदान / डायग्नोसिस ?
मूत्र की जांच कराएं।
किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) या जिसे (RFT) अर्थात् रिनल फंक्शन टेस्ट भी कहते हैं, इसे कराएं।
USG - KUB टेस्ट कराएं।
किसी - किसी मामले में तो आपको मूत्र में प्रोटीन रिसाव के सटीक कारण का पता लगाने के लिए किडनी बायोप्सी भी करने की परामर्श आपको आपके चिकित्सक दे सकते हैं।
यह आपके रोग की स्तिथि और परिस्थिति पर निर्भर करता है,
जिसमें किडनी के कुछ ऊतकों को एक सुई का उपयोग करके बाहर निकाल लिया जाता है और फिर उन ऊतकों को एक माइक्रोस्कोप के नीचे रख के परीक्षण किया जाता है।
यदि आपको विशेषज्ञ परीक्षणों के बाद आपके लिए कोई चिकित्सा या उपचार निश्चित करता है तो उसका पालन करें।
किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंग के रोग के लिए विशेषज्ञों से ही परामर्श लें। सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करें।
यदि इसका समय पर सही चिकित्सा या उपचार न लिया जाए तो भविष्य में जाकर किडनी विफल होने की आशंका रहती है।
इन लक्षणों को इग्नोर नही करें, यथाशीघ्र इसका समाधान कराएं नही तो झेलने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम।
ऐसी स्तिथि में किडनी के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। हो सकता है कि क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ जाय या मूत्र में यूरिया की मात्र बढ़ जाए और ऐसी स्तिथि में शरीर में रक्त की कमी भी हो सकती है, जिससे कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अतः इन सभी लक्षणों का पूर्ण रूपेण उपचार अतिआवश्यक है नही तो संभव है कि डॉक्टर आपको डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कह दें।
आइए जानते हैं , डाइट या भोजन में क्या लें -
अल्काइन डाइट लेना लाभदायक है।
हाइड्रेशन मेंटेन रखें अर्थात् जल का भरपूर सेवन करें।
फाइबर युक्त भोजन लें।
बिना रिफाइन के भात या रोटी खाएं।
मूंग दाल, अरहर दाल, खिचड़ी, दलिया, पोहा और उपमा का सेवन लाभदायक है।
ताजे फल, हरी सब्जियां और सलाद का सेवन उत्तम है।
डाइट या भोजन में क्या नहीं लें -
एसिडिक डाइट लेने से बचें।
किडनी स्टोन से पीड़ित रोगी ऑक्जेलेट रिच फूड जैसे - टमाटर, पालक, चॉकलेट इत्यादि लेने से बचें।
डिहाइड्रेशन नही होने दें।
कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ या डिप फ्राइड डाइट लेने से बचें।
मिर्च, मशाला, तली - भुनी खाद्य पदार्थ से बचें।
दही या खट्टी चीजें नहीं खाएं।
जंक फूड्स या प्रोसेस्ड फूड्स नही खाना ही अच्छा रहता है।
नमक और चीनी का सेवन सीमित मात्रा में करें।
अनावश्यक या अत्यधिक पेन किलर खाने से बचें।
स्मोकिंग या धूम्रपान करने से बचें।
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