Copy and paste the AdSense code in between the tags of your site Place this code on every page across your site and Google will automatically show ads in all the best places for you Health & wealth

G1

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

Inflametion

        Inflametion  सूजन की समस्या 

शरीर के विभिन्न भागों  की सूजन -  चिकित्सा में न करें देरी |

चेहरे पर सूजन, पैरों में सूजन , हाथों में सूजन, जीभ में सूजन, आंखों की सूजन, पेट में सूजन, 
क्या है यह समस्या और इससे कैसे बचे रह सकते हैं आप,
 कैसे होती है यह समस्या ?
क्या है इसका समाधान ?
सूजन से कैसे बचा जाए ?
 सूजन को कम करने के क्या हैं उपाय ? 
आईये जानें -





Dr. Prakash

Ellam ram Chowk,

Bettiah – 845438
Cell – 9135167135.

सूजन की समस्या को हल्के में न लें। 
यह कई तरह की बड़ी-बड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है।

अचानक एक पैर में सूजन, लाली और गर्माहट तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डी.वी.टी.) यानी टांगों की नसों में खून के कतरों का जमाव अत्यंत गंभीर स्थिति के सूचक हो सकते हैं। साधारणतः  लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान लेते हैं और उसका चिकित्सा कराने लगते हैं।


सामान्य डॉक्टर भी इसे फाइलेरिया, सायटिका अथवा नस उखड़ना मान लेते हैं। फाइलेरिया के चिकित्सा के नाम पर कई सप्ताह तक पीड़ितों को दवाएं देते हैं या फिर हड्डी विशेषज्ञ नस उखड़ने के चिकित्सा के नाम पर रोगी के पैर पर वजन लटका देते हैं। चिकित्सा के इन गलत तौर-तरीकों से डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या गंभीर हो जाती है और एक समय रोगी की जान खतरे में पड़ जाती है।


क्या हैं कारण :-
विशेष तौर पर पैरों की कसरत नहीं करने, किसी व्याधि या ऑप्रेशन के कारण लंबे समय तक विछावन पर पड़े रहने और डॉक्टर की परामर्श के बिना अधिक दिनों तक हारमोन अथवा गर्भ निरोधक औषधियों के सेवन करने पर डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा फेफड़े, पैंक्रियाज या आंतों का कैंसर होने और किसी खराबी या व्याधि के कारण रक्त की आवश्यकता  से अधिक गाढ़ा हो जाने पर भी यह समस्या हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में प्रसव के तुरंत बाद यह व्याधि हो सकता है। इसके अलावा लकवे से पीड़ित महिला को यह समस्या होने की आशंका अधिक रहती है, क्योंकि ऐसे पीड़ित व्यायाम नहीं कर पाते तथा उनके रक्त में गाढ़े होने की प्रवृत्ति अधिक रहती है।

कभी-कभी पूरे शरीर में या फिर किसी अंग विशेष में सूजन आ जाती है। विशेष रूप से हम इसकी अनदेखी करते हैं या फिर दर्द निवारक तेल व मरहम से इसे दूर करने का प्रयास करते हैं। पर हर बार यह लापरवाही ठीक नहीं। यह सूजन शरीर में छिपी किसी बड़ी व्याधि का संकेत भी हो सकती है।

चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में लंबे समय से बनी हुई सूजन को देख कर भी अनदेखा करना समझदारी नहीं है। यदि शरीर में बार-बार पानी एकत्र हो रहा है तो यह हृदय, लिवर या किडनी की किसी समस्या का संकेत हो सकता है। 


जब शरीर में अतिरिक्त फ्लूइड यानी पानी इकट्ठा हो जाता है तो शरीर में सूजन आने लगती हैजिसे एडिमा कहा जाता है। जब यह सूजन टखनों, पैरों और टांगों में आती है तो उसे पेरिफेरल एडिमा कहते हैं। फेफड़ों की सूजन पलमोनरी एडिमा और आंखों के पास आने वाली सूजन पेरिऑरबिटल एडिमा कहलाती है। शरीर के ज्यादातर भागों में दिखायी पड़ने वाली सूजन को मैसिव एडिमा कहा जाता है। इस स्थिति में  मसूड़ों, पेट, चेहरे, स्तन, लसिका ग्रंथि व जोड़ों आदि सभी भागों पर सूजन आ जाती है। ज्यादा देर तक खड़े रहने या बैठने की वजह से होने वाली सूजन को ऑर्थोस्टेटिक एडिमा कहा जाता है। हल्की सूजन ज्यादातर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन अधिक समय तक रहने वाली ज्यादा सूजन गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है।

महिलाएं पैरों में सूजन यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस की शिकार अधिक होती हैं। वर्तमान समय में व्यायाम नहीं करने की प्रवृत्ति और महिलाओं में गर्भनिरोधक औषधयों एवं हारमोन के बढ़ते सेवन के कारण डीप वेन थ्रोम्बोसिस का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके अलावा फैशन के प्रभाव में ऊंची एड़ी यानी हाई हील वाली सैंडिलों के प्रचलन से भी इस व्याधि का खतरा बढ़ता है।

पेट या शरीर के किसी भी अंग में एक सप्ताह से अधिक सूजन रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऐसे मामले अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए भी कि पुरुषों के तुलना में महिलाओं में वसा का अनुपात अधिक होता है और वसा कोशिकाएं अतिरिक्त पानी संचित कर लेती हैं। नियमित व्यायाम व खान-पान में लापरवाही भी एडिमा की स्थिति को अधिक बढ़ा सकती है।



पैरों और टखनों में सूजन और इसके साथ सांस फूलना, अधिक थकान, वजन कम होना, लगातार खांसी और हृदय की तेज धड़कन-हार्ट के काम करने की गति कम होने यानी हार्ट फेलियर के लक्षण हो सकते हैं। पैरों और टखनों की सूजन शरीर में तरल जमा होने से होती है जो खराब होते हार्ट का संकेत हो सकती है। पैरों में तरल जमा होने का कारण हृदय से खून का प्रवाह कम होना होता है। इससे पेट और शरीर के निचले हिस्से में तरल जमा होता है और प्रवाह बाधित होता है।






डीप वेन थ्रोम्बोसिस को समझने के लिए हाथ या पैर में रक्त संचार को समझना आवश्यक है। पैर या हाथों की शिराएं यानी वेन्स ऑक्सीजन रहित गंदे रक्त को इकट्ठा करके हृदय की ओर ले जाती है। वहां से अशुद्ध रक्त शुद्ध होने के लिए फेफड़े में जाता है। कई बार इन शिराओं में रक्त के कतरे जमा होकर रक्त के बहाव को रोक देते हैं। इससे शिराएं जाम हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप पैर या हाथ में सूजन होने लगती है। यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस की प्रारंभिक स्थिति है और इसका समय पर समुचित चिकित्सा न होने पर पैर या हाथ काटने या मरीज की जान जाने की स्थिति भी आ सकती है।



इस व्याधि में पैर या हाथ में गंदे रक्त के साथ-साथ शरीर का पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स एवं खनिज जैसे जरूरी अवयव भी जमा हो जाते हैं। इससे शरीर की अंदरूनी क्रियाएं गंभीर रूप से बाधित हो जाती हैं। इससे फ्लेग्मेसिया सेरूलिया डोलेन्स (पी.सी.डी.) नामक जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। पैर तथा हाथ की शिराओं में गंदे रक्त, पानी एवं अन्य जरूरी अवयवों के जमा हो जाने से शिराओं में ऊतक दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे शुद्ध रक्त ले जाने वाली रक्त धमनियां बाधित हो जाती हैं और धमनियों में भी रक्त का बहाव रुक जाता है। इससे पैर अथवा हाथ काले पड़ने लगते हैं और गैंगरीन नामक भयंकर अवस्था की शुरुआत हो जाती है। गैंगरीन हो जाने पर टांग या पैर काटने के अलावा और कोई उपाय नहीं बचता।




ह्रदय से जुड़ी व्याधियों, किडनी की समस्या, असंतुलित हॉरमोन और स्टेरॉयड औषधियों के सेवन के कारण से एडिमा की समस्या हो सकती है। दरअसल इन सभी स्थितियों में हमारी किडनी सोडियम को संचित कर लेती है। हालांकि कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के एक सप्ताह पहले भी कुछ ऐसे ही लक्षण नजर आते हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन हारमोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से किडनी ज्यादा पानी रोकना शुरू कर देती है। हमारा अनियमित भोजन व जीवनचर्या भी एडिमा की बड़ी वजह है। 

हार्ट फेलियर के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं। संभव है कि कुछ लोगों में हार्ट फेलियर के बहुत ही प्रारंभिक चरण में कोई लक्षण हो ही नहीं। हार्ट फेलियर के लक्षण सामान्यतः धीरे-धीरे सामने आते हैं। सबसे पहले, ये ऐसे ही समय में हो सकते हैं, जब आप बहुत सक्रिय हों। कुछ समय बाद आपको सांस लेने में समस्या अनुभव हो सकती है और फिर अन्य लक्षण तब सामने आते हैं, जब आप विश्राम कर रहे हों। हृदय जब हार्ट अटैक या किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हो जाए तो लक्षण अचानक भी सामने आ सकते हैं।

पेट में सूजन कब्ज, गैस, काबरेनेटेड ड्रिंक्स और फूड एलर्जी के कारण हो सकती है। अधिक फास्ट व जंक फूड के सेवन से भी ऐसा होता है। हाई प्रोसेस्ड फूड में सोडियम की मात्रा अधिक और फाइबर कम होता है, जो पेट में भारीपन और सूजन का कारण बन सकता है। इसलिए डिब्बा बंद आहार या प्रोसेस्ड आहार लेते समय सोडियम की मात्रा जांच लें। अधिक सोडियम का शरीर में जाना सूजन का कारण बन जाता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की दवाओं व हारमोनल थेरेपी की वजह से भी सूजन देखने को मिलती है। पेट की सूजन को दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। खाने के बाद अजवायन में काला नमक मिला कर खाने से पाचन एकदम सही हो जाता है और सूजन भी नहीं होती। अधिक शराब पीने वालों का लिवर सिकुड़ने के कारण से भी पेट पर सूजन आ जाती है। मूत्र पीला आने लगता है। ऐसे में यथाशीघ्र  डॉक्टर से परामर्श लें। 

लोग थकान और सांस फूलने जैसे लक्षणों को बढ़ती आयु के संकेत के रूप में अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, कभी-कभी हृदय पर्याप्त रक्त पंप करने और आपके अंगों- किडनी और मस्तिष्क को इसकी सप्लाई करने में सक्षम नहीं होता है तो आप कई तरह के लक्षण अनुभव कर सकते हैं। इनमें रात में ज्यादा मूत्र आना, स्मरणशक्ति कम होना और भ्रम शामिल हैं।

चेहरे पर सूजन - इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे - फ्लूइड का इकट्ठा होना, चोट लगना, संक्रमण या फिर कैंसर। यह सूजन गाल, आंख व होठों के पास भी होती है। इस तरह की सूजन को मेडिकल साइंस में फेशियल एडिमा कहते हैं। यदि चेहरे की सूजन थोड़े समय के लिए होती है तो ऐसा संक्रमण के कारण हो सकता है, पर बार-बार ऐसा होने के साथ-साथ चेहरा लाल, ज्वर या सांस लेने में परेशानी होती है तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टरी परामर्श लेकर पूरा उपचार करवाएं। 

हार्ट फेलियर के जोखिम घटकों में उच्च रक्तचाप (हाइपर टेंशन) हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफारक्शन), असामान्य हार्ट वाल्व, हृदय का बड़ा होना (कार्डियोमायोपैथी), हृदय की व्याधि और डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास शामिल हैं।

पैरों में सूजन  - पैरों में सूजन के भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोच, लंबी दूरी तक यात्रा करना, ज्यादा देर तक खड़े रहना, व्यायाम या फिर खेल-कूद आदि। लेकिन अचानक एक या दोनों पैर में भारी सूजन, लाली और गर्माहट तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी)  की परेशानी हो सकते हैं। इसमें टांगों की नसों में रक्त के कतरों का जमाव होता है। अक्सर लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान कर इलाज कराने लगते हैं। सामान्य डॉक्टर भी इसे फाइलेरिया, सायटिका अथवा नस चढ़ना मान बैठते हैं।

फाइलेरिया के चिकित्सा के नाम पर कई सप्ताह तक पीड़ितों को औषधि दी जाती हैं या फिर सही व्याधि पकड़ में न आने पर पीड़ित के पैर पर वजन लटकाने की सलाह दी जाती है, जिससे समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं डीवीटी की शिकार अधिक होती हैं। नियमित व्यायाम न करना, गर्भ निरोधक दवाओं का अधिक परायोग और हारमोन असंतुलन के कारण भी ऐसा होता है। लंबे समय तक ऊंची एड़ी वाले फुटवियर पहनने से भी यह आशंका बढ़ जाती है। पैरों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन हृदय रोगों की आशंका को भी दर्शाती है। पैरों की सूजन को कम करने के लिए गरम पानी में नमक डाल कर उसमें अपने पैरों को डुबोएं। सोने से पहले पैरों की गरम तेल से  मालिश करें। इससे सूजन व दर्द में कमी आएगी। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से भी रक्त संचार नियमित होता है, जो सूजन व पीड़ा निवारक है। 

आंखों की सूजन - आंखों की सूजन ज्यादातर संक्रमण, एलर्जीकॉर्नियल अल्सर, कंजक्टिवाइटिस, स्टाई, ट्यूमर बनने या वायरल इन्फेक्शन के कारण होती है। आंखें शरीर का सबसे आवश्यक व कोमल अंग होती हैं। उनके उपचार में कोई रिस्क न लें। डॉक्टर के परामर्श से स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की सहायता से आंखों की सूजन को ठीक किया जा सकता है। 

पैरों में सूजन जो प्रातः में कम और दिन चढऩे के साथ बढ़-बढ़ जाती हो 

यह हृदय की व्याधि के बढऩे की चेतावनी हो सकती है...


'हार्ट फेलियर' सुनने में ऐसा लगता है जैसे हार्ट काम नहीं कर रहा है और इसके बाद कुछ नहीं किया जा सकता है। वास्तव में, हार्ट फेलियर का अर्थ है कि हृदय ठीक से पंप नहीं कर रहा है, जैसा इसे करना चाहिए।

हाथों में सूजन - हाथों व उंगलियों में सूजन एक आम समस्या है, विशेषकर बढ़ती आयु में जब शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है तो यह समस्या विशेषरूप से देखी जाती है। ऐसा एडियोपैथिक एडिमा के कारण होता है। ऐसे में हाथों के कुछ सरल व्यायाम और स्ट्रेचिंग सहायक हो सकते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में यह सूजन लिवर व किडनी रोग का संकेत भी होती है। इसके अतिरिक्त हृदय रोग, गठिया, रक्त विकार, हाइपो थाइरॉएड, रूमेटाइड  अर्थराइटिस में यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस स्थिति में शरीर के विभिन्न जोड़ों में सूजन आ जाती है। त्वचा संक्रमण के कारण भी ऐसा होता है। सामान्य व्यायाम व मसाज से लाभ न मिलने पर डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें। 

वैसे तो हार्ट फेलियर गंभीर स्थिति है और इसमें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है पर जैसा कि इसके नाम से लगता है, इससे मौत होना जरूरी नहीं है। अच्छी तरह इलाज किया जाए तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है और बार-बार कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाने की आवश्यकता नहीं होती है। सही उपचार से आपके हृदय को सहायता मिलेगी और यह सामान्य ढंग से काम कर पाएगा।

जीभ में सूजन - जीभ में कई कारणों से सूजन आ सकती है, जैसे - औषधयों का साइड इफेक्ट, एलर्जी, हारमोन थेरेपी। इसे एंजियोडिमा कहते हैं। इस स्थिति में संक्रमण त्वचा के भीतर गहराई में पहुंच जाता है। हमारी जीभ एपिथेलियम नाम की कोशिकाओं से बनी होती है। इसकी सतह पर बने टेस्ट बड्स से ही हमें खट्टे, मीठे या कड़वेपन का अनुभव होता है। जब जीभ पर सूजन आ जाती है तो टेस्ट बड्स भी सूज जाते हैं, जिसकी वजह से सांस लेने में भी असुविधा होती है। इस सूजन की अनदेखी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 



हार्ट फेलियर का आम कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी छोटी रक्त कोशिकाओं का संकरा होना है जो हृदय को खून और ऑक्सीजन की सह्रश्वलाई करती है। इससे हृदय की मांसपेशियां कुछ समय में या अचानक कमजोर हो सकती हैं। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप दूसरा कारण है जो हृदय की मांसपेशियों में सख्ती लाता है और आखिरकार मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

पैर या हाथ में किसी भी तरह की समस्या होने अथवा हल्का-सा भी डी.वी.टी. का संदेह होने पर - तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए
ताकि प्रारंभिक अवस्था में ही इस व्याधि पर नियंत्रण पा लिया जाए। 

क्या है समुचित चिकित्सा - ऐसे पीड़ितों के चिकित्सा में अत्याधुनिक डॉप्लर जांच, ईको कार्डियोग्राफी, एंजियोग्राफी तथा पल्मोनरी इम्बोलिज्म का पता लगाने के लिए फेफड़े और फेफड़े की नली की विशेष जांच (वेंटिलेशन परफ्यूजन लंग स्कैन) व मल्टी सी.टी. एंजियो आदि की जांच विशेष रूप से करना चाहिए।


हार्ट फेलियर के मामले में आपके लक्षण भी दूसरों से मिलें, यह आवश्यक नहीं है। कोई भी निश्चित रूप से यह नहीं बता सकता है कि किसे ऐसा होगा पर जोखिम घटक ज्ञात हैं। जोखिम घटकों की जानकारी होने और प्रारम्भ में ही उपचार के लिए डॉक्टर को दिखाना हार्ट फेलियर के बचाव का सबसे अच्छा उपाय है।

इससे कैसे बचा जाए -
इस व्याधि की रोकथाम के लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए। प्रतिदिन तीन से चार किलोमीटर तक टहल करने तथा पैरों की कसरत करने से पैरों की शिराओं में ऑक्सीजन रहित गंदे रक्त को रुकने का मौका नहीं मिलता और मांसपेशियों का पम्प अच्छी तरह काम करता है। लंबे समय तक बेड रेस्ट में रहने वाले लोगों, कैंसर तथा लकवा के पीड़ितों, नवजात शिशुओं की माताओं तथा गर्भ निरोधक गोलियों एवं हारमोन का सेवन करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।


 हमारा शरीर हृदय की पंपिंग पर निर्भर करता है और इसी से ऑक्सीजन और पोषण के दृष्टि से समृद्ध रक्त शरीर की कोशिकाओं में पहुंचता है। जब कोशिकाएं उपयुक्त ढंग से पोषित होती हैं तो शरीर सामान्य ढंग से काम कर सकता है। हार्ट फेलियर की स्थिति में कमजोर हृदय कोशिकाओं को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाता है।

हार्टफेलियर की स्थिति में पहली पंक्ति का उपचार औषधियों और जीवनशैली में सुधार है। जो पीड़ित हार्ट फेलियर की एडवांस स्टेज में हैं, उनके मामले में कार्डियक रीसिनक्रोनाइजेशन थेरेपी (सीआरटी) को हार्ट फेलियर के उपचार के प्रभावी रूपों में एक माना जाता है। इसमें इंह्रश्वलांट करने योग्य एक उपकरण का उपयोग किया जाता है जो हृदय की पंप करने की कार्यकुशलता को बेहतर करता है। हार्ट फेलियर के जिन मरीजों के हृदय में बिजली के कंडक्शन से संबंधित समस्या होती है, उनके मामले में रीसिनक्रोनाइजेशन थेरेपी हृदय से पूरे शरीर में खून का प्रवाह बेहतर करती है। परिणामस्वरूप लक्षण कम हो सकते हैं। तब अस्पताल जाने और मृत्यु की आशंका भी कम हो जाती है।

सूजन को कम करने के उपाय-
 डॉ. रमेश चंद्र पवित्रन के अनुसार -  सामान्य स्थितियों में जीवनशैली व खान-पान में बदलाव करके सूजन की समस्या से मुक्ति पायी जा सकती है। 

-
हरी सब्जियों व फल के सेवन से विटामिन बी-वन की कमी पूरी होती है। 
- प्रोटीन के लिए दूध, सोयाबीन व दाल का सेवन लाभकारी होता है। इनके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। रक्त की कमी पूरी होती है, जो सूजन का एक मुख्य कारण है।

-
एडिमा की स्थिति में शराब और कैफीनयुक्त चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और पानी के अवशोषण की समस्या बढ़ जाती है। 
- हर्बल चाय पिएं। 
- विशेषतौर पर अजवायन की चाय सबसे अच्छी मानी जाती है। 

-
शरीर की आवश्यकता से अधिक नमक का सेवन भी पानी के अवशोषण की समस्या को बढ़ा सकता है। 
- अधिक नमकयुक्त  चीजों के सेवन से बचें।  

-
मोटापा होने पर सबसे पहले थोड़ा वजन घटाएं। - -- एक कैलोरी चार्ट बनाएं और उसके आधार पर खान-पान की सूची तैयार करें। 

- प्रतिदिन 
एक्सरसाइज करने की आदत डालें। इससे पसीने के रूप में शरीर का अतिरिक्त पानी निकल जाता है। त्वचा भी अच्छी रहती है। 
- घूमना, टहलना, तैराकी या नृत्य, अपनी सुविधानुसार आप किसी भी व्यायाम का चुनाव कर सकते हैं।

-
शरीर की नसों, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के कामकाज को नियंत्रित करने में सोडियम के साथ पोटैशियम का भी योगदान होता है। 
- पोटैशियम के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच फल और सब्जियों का सेवन अवश्य करें। 
- अखरोट, बादाम, मूंगफली आदि भी पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं। 

-
शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में विटामिन बी-6 बहुत सहायक है। 
- ब्राउन राइस विटामिन बी-6 के अच्छे स्रोत हैं। 

-
विटामिन बी-5, कैल्शियम और विटामिन डी सूजन को कम करने में लाभकारी हैं। 
- नियमित रूप से कुछ देर प्रातःकाल धूप का सेवन करें। 

-
खाने में कैल्शियम के स्तर की जांच करें।
- प्रतिदिन टोंड दूध पिएं। 
- दही, हरी पत्तेदार सब्जियां और अंजीर खाएं।

औषधि - 1. Immu Rich - 1 कैप्सूल, 3 बार ( भोजन से पहले )
2. Omega Rich - 1 कैप्सूल, 3 बार ( भोजन के बाद )
3. Cal Rich - 1 कैप्सूल, 3 बार ( भोजन के बाद )
4. Green Rich - 1 कैप्सूल, 3 बार ( भोजन के बाद ) प्रयोग किया जा सकता है ।
विशेष जानकारी हेतु संपर्क करें - 9135167135 पर.

🔲🔲🔲🔲🔲🔲
मित्रों यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगती है तो इसे नीचे दिए गए -
Like & Follow बटन को क्लिक अवश्य करें ताकि समय - समय पर हमारे द्वारा दी जानेवाली सूचनाएं एवं जानकारियां आपको बिल्कुल निःशुल्क प्राप्त होती रहे ।
🔲🔲🔲🔲🔲🔲

विशेष आग्रह - कृपया इस जानकारी को आप अपने जाननेवाले, इष्टमित्रों एवं सहयोगियों को शेयर करें ताकि वो भी इस तरह की जानकारी से परिचित हों एवं अपने स्वास्थ्य की रक्षा में सक्षम हो सकें ।
धन्यवाद ।
💐💐💐💐💐💐
Advertise with us, call : 7004015174.

शनिवार, 11 नवंबर 2017

G s t

GST Complete list rate wise


*0% GST Rates Items* – गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।

*5% GST Rates Items* – ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, खाद्य तेल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, मसाले, जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।

*12% GST Rates Items* – नमकीन, भुजिया, बटर ऑयल, घी, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।

*18% GST Rates Items* – हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।

*28% GST Rates Items* – कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।
💐💐💐💐💐💐
Summary of the #GSTCouncil meeting of November 10, 2017

*Composition scheme expanded*
Threshold for Composition scheme to be increased to Rs. 1.5 Crores. Uniform tax rate of 1% applicable for both traders and manufacturers. Composition suppliers allowed services upto Rs. 5 lakh per annum for eligibility. Exempted supply not to be taxed at 1%.

*Returns*

Filing of Form GSTR 2 and GSTR 3 has been suspended for the current financial year. Only GSTR 1 is to be filed as per the below schedule.

For suppliers having turnvover below 1.5 crores,
For the period of July to Sept - 31st Dec 2017
For the period of Oct to Dec - 15th Feb 2018
For the period of Jan - Mar - 30th Apr 2018

For suppliers having turnvover more than 1.5 crores,
For the period of Jul to Oct - 31st Dec 2017
For the month of Nov - 10th Jan 2018
For the month of Dec - 10th Feb 2018
For the month of Jan - 10th Mar 2018
For the month of Feb - 10th Apr 2018
For the month of Mar - 10th May 2018


Filing of return in Form 3B to be continued till March. For small taxpayers, return to be simplified. It is not clear whether small suppliers will have to file monthly or quarterly (as proposed in the last meeting).

A committee to simplify details of GSTR 2 and GSTR 3 will be setup.

*TRAN-1 date extended *
The due date of TRAN-1 has been extended to December 31, 2017.

*Penalties reduced*
Rate of penalty for delay in filing of returns will be reduced from Rs. 200 per day to Rs. 20 per day for suppliers with nil returns. For others, penalty to be reduced to Rs. 50 per day.

*GSTR-4 extended*

Due date for return of suppliers covered in composition scheme in Form GSTR-4 has been extended to 24th December 2017.

*Changes in Rates*

1. 5% Tax on all Restaurants other than 5-Star *without ITC*

2. Rates reduced for 178 items from 28% to 18% effective Nov 15, 2017.
 - Washing Machines
 - Air Conditioners
 - Make up
 - Sanitary Items
 - Marble/flooring
 - Toiletries

3. Rates reduced from 28% to 12%
 - Wet grinders
 - Armoured fighting vehicles

4. Rates reduced from 18% to 12% for 13 items, from 5% to 0% for 6 items, from 12% to 5% - 8 items.
💐💐💐💐💐💐

*साढ़े तीन मिनिट: डॉक्टर की सलाह!*

              डॉ. प्रकाश,
          बेतिया - 835438,
           बिहार
     
        *जिन्हें सुबह या रात में सोते समय  पेशाब करने जाना पड़ता हैं उनके लिए विशेष सूचना!!*

        हर एक व्यक्ति को इसी साढ़े तीन मिनिट में सावधानी बरतनी चाहिए।

*यह इतना महत्व पूर्ण क्यों है?*
        यही साढ़े तीन मिनिट अकस्माक होने वाली मौतों की संख्या कम कर सकते हैं।

        जब जब ऐसी घटना हुई हैं, परिणाम स्वरूप तंदुरुस्त व्यक्ति भी रात में ही मृत पाया गया हैं।

        ऐसे लोगों के बारे में हम कहते हैं, कि कल ही हमने इनसे बात की थी। ऐसा अचानक क्या हुआ? यह कैसे मर गया?

       इसका मुख्य कारण यह है कि रात मे जब भी हम मूत्र विसर्जन के लिए जाते हैं, तब अचनाक या ताबड़तोब उठते हैं, परिणाम स्वरूप मस्तिष्क तक रक्त नही पहुंचता है।

       यह साढ़े तीन मिनिट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

      मध्य रात्रि जब हम पेशाब करने उठते है तो हमारा ईसीजी का पैटर्न बदल सकता है। इसका कारण यह है, कि अचानक खड़े होने पर मस्तिष्क को रक्त नहीं पहुच पाता और हमारे ह्रदय की क्रिया बंद हो जाती है।

           साढ़े तीन मिनिट का प्रयास एक उत्तम उपाय है।

1. *नींद से उठते समय आधा मिनिट गद्दे पर लेटे हुए रहिए।*

2. *अगले आधा मिनिट गद्दे पर बैठिये।*

3. *अगले अढाई मिनिट पैर को गद्दे के नीचे झूलते छोड़िये।*

          साढ़े तीन मिनिट के बाद आपका मस्तिष्क बिना खून का नहीं रहेगा और ह्रदय की क्रिया भी बंद नहीं होगी! इससे अचानक होने वाली मौतें भी कम होंगी।

     आपके प्रियजनों को लाभ हो अतएव सजग करने हेतु अवश्य प्रसारित करे।
               
            *धन्यवाद!!*

           डॉ. प्रकाश,
          बेतिया - 835438,
           बिहार
     🙏निवेदन एवं आग्रह 🙏

          आपको सिर्फ 10 लोगो को ये  Forward करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को फॉरवर्ड करें ।
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा। —

अच्छा लगे तो कृपया सभी मित्र के साथ शेयर करें --
Free health tips on whatsapp 7004015174.

UP DHANWANTARI PARIWAR

🎂🎂खुशखबरी खुसखबरी खुशखबरी🎂🎂

👌9 दिसम्बर शनिवार होटल रमाडा लखनऊ👌
💐जुनाब गंज लखनऊ कानपुर  हाइवे रोड💐

💐💐हिस्ट्री मेकिंग  💐💐लाइफ चेंजिंग💐💐
 💐💐एलडीपी  सुबह  9  से  शाम 5 बजे 💐💐

मुख्य अतिथि  💐💐💐
💐💐💐डॉ  रमेश पाटिल सर💐💐💐
💐💐💐 प्रकाश खलाटे सर💐💐💐
💐💐💐 💐शशि कांत सर 💐💐💐💐

🎂💐🎂💐ग्रेट मोटिवेटर डॉ विवेक विन्द्रा 💐🎂💐🎂

💐💐💐💐शैलेन्द्र शुक्ला जी💐💐💐💐

    🎂🎂🎂💐समस्त💐🎂🎂🎂
 💐💐💐💐exe डॉयमंड 💐💐💐💐
💐💐💐💐💐डॉयमंड💐💐💐💐💐

💐💐जिंदगी बदलना है तो चूकना नही💐💐


Dhanwantari Mega success full Meting ( Product & Plan Presentesion) Program.

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

👪😄💥💥🔥🔥🔥

Date 14/11/2017  Tuesday 

Time--10:00 Am To
 04:00Pm.💢💢💢💢

Entry Fees 20rs only 

Address----💥💢💥💢💥Bas stop press club faizabad
 🏢🏢🏢🏢🏢

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Chief Guest -

Mr Vijay rawat Sir Daimond 

💎💎💎💎💎💎💎
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

Orgnaiger -

Mr Subham singh ji 
Active Ruby

Mr Shivram verma ji Active Ruby 

Mr Muri dhar ji Active Ruby 

Mr Dharam singh ji Active pearl 

Mr Amar Bahadur singh ji Active pearl 

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏

PLZ ALL LEADERS COME WITH DAIRY AND PEN WITH DRESS CODE

💐💐💐💐💐💐






🎄🌹🎄🌹🎄🌹🎄🌹Dhanwantari Mega success full Meting  Product & Plan Presentesion Program. ⚽🎤⚽🎤⚽🎤⚽?🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻
 🍓🍓🍓🍓🍓🍓🍓
👪😄💥💥🔥🔥🔥

Date 14/11/2017 Tuesday.. 

Time--⌚10:00 pm To
 3:00Pm.💢💢💢💢

Entry Fees 20rs. only 
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
Address----💥💢💥💢Hindu inter college Rudauli, faizabad
 🏢🏢🏢🏢🏢
🎄🎄🎄🎄🎄
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
Chief Guest -
1-Dr.M.R.Sagar Ruby++
2-Mr. G.P.Mauriya Active parl
🚘🚘🚘🚘🚘🚘
💎💎💎💎💎💎💎
🍅🍅🍅🍅🍅🍅🍅
Orgnaiger -
1- Dr. Manoj pearl
2- J.K.Pearl 
3-Mr.Vijendra kumar Active Leader 
4- Pappu
5-Gulsan
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
PLZ ALL LEADERS COME WITH DAIRY AND PEN WITH DRESS CODE 🚘🚘🚘🚘🚘🚘

💐💐💐💐💐💐




💐💐💐💐💐💐


💥💥💥💥💥💥💥
*Dear All Res.Guests & Invitee*

*Here Is The Schedule Program For 17th Nov.Grand Function*
*1.BreakFast 8-9 am*
*(Breakfast Strictly Closed Upto 9 am,No Circumstances Will allowed For Breakfast After 9 am)*
*2.Prayer Will Start Sharp 9:10 am*
*3.Welcome Of Our Guest & Honour Of Best Performer Of Year 2016-2017*
*9:15-9:45 am*
*4.Chairman Speech*
*9: 45-10:00 am*
*5.Mike Will Hand over To Sensation Dr.Bindra Sir*
*10:00 -2 Pm.*
*6.Lunch -2-2:45*
*7.Again Dr.Bindra Sir*
*2:50 pm Till End*

*It Is Humble Request Pls Maintain Time Schedule, Do Co-Operate & Enjoy The Mind Blowing Life Changing Program With Us*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
*Thank You*
*Team Chhatisgarh*

💐💐💐💐💐💐


💐💐💐💐💐💐


🌹Dear Distiributors🌹

हमेशा की तरह इस रविवार  दिनॉक 12/11/2017 को समय अपरान्ह 12 बजे से स्थान मार्डन पब्लिक स्कूल, पराग डेरी आशियाना कानपुर रोड लख्नऊ पर लीडर्स मीटिंग रखी गयी है ! जिसमें अधिक से अधिक लोगों को लाकर मीटिंग को सफल बनायें! 

🌸🌸प्रवेश शुल्क ,-: मात्र 20 रुपये



जिसमें मुख्य अतिथी शिरकत करेंगे  हमारे राकेट लीडर आदरणीय  श्री मिश्रा सर जी डायमंड 💎💎
आदरणीय  श्री नौशाद सर जी ऐक्टिव रूबी सर जी❤❤

 श्री चन्दिृका प्रसाद सर जी पर्ल ++🌸🌸

 श्री राम बिलाश सर जी ऐक्टिव पर्ल 🌹🌹

नोट :- सभी लीडर्स को ड्रेस कोड मे आना अनिवार्य  है पेेन और डायरी के साथ 
🙏🙏धन्यवाद 🙏🙏 
 साथियो और हमारे गुरू जन 
 अगर कही गलत लिख गया हो तो माफ करना 
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
धन्यवाद |



          Advertise with us. Call : 7004015174.

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

शरीर में रक्त नहीं बनने के कारण क्या हैं ।


इन कारणों से नहीं बनता है शरीर में नया रक्त -

एप्लास्टिक एनीमिया ऐसी समस्या है जिसमें बोनमैरो में ब्लड नहीं बन पाता। ऐसी स्थिति में व्याधिग्रस्त को कमजोरी, थकावट समेत कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।
यह किसी भी आयु में हो सकता है जिसके लक्षण अचानक सामने आते हैं। इसकी कई कारण हो सकती हैं -
कारण जो बोनमैरो को करते हैं प्रभावित -
अस्थियों में उपस्थित बोनमैरो की स्पंजी सेल्स ब्लड का निर्माण करती हैं। इनके प्रभावित होने के कारण कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और ब्लड बनना बंद हो जाता है।

बोनमैरो में चोट : रीढ़ की अस्थियों में चोट लगने से इसकी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और रक्त बनने की प्रक्रिया बाधित होती है।
हार्मोन असंतुलन : कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी में हार्मोनल असंतुलन के कारण इम्यून सिस्टम बोन -मैरो को क्षति पहुंचाता है।
रेडियो या कीमोथैरेपी : कैंसर में दी जाने वाली रेडियो या कीमोथैरेपी से कई बार बोनमैरो की सेल भी प्रभावित हो जाती हैं। यह स्थायी या अस्थायी दोनों तरह से हो सकती है।

वायरल इंफेक्शन : अधिकतर वायरस का संबंध ब्लड से होता है। इनमें हेपेटाइटिस, एचआईवी, परवो वायरस-बी 19 आदि हैं।
आर्थराइटिस की औषधि : जोड़ों के वेदना में ली जाने वाली औषधियों एवं कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स का असर बोनमैरो पर पड़ता है।

इन्हें अधिक खतरा...

अधिक डोज के साथ कैंसर का चिकित्सा कराने वाले पीड़ित, कीटनाशकों का छिड़काव करने वाले या इसे बनाने वाले कर्मचारी, गर्भवती महिलाएं, ऑटो इम्यून समस्याओं से पीडि़तों को इसका गंभीर भय अधिक होता है।

जांच : रक्त में आरबीसी, डब्ल्यूबीसी व प्लेटलेट्स की संख्या पता लगाने के लिए ब्लड काउंट टैस्ट कराया जाता है। ये काउंट निर्धारित मात्रा से कम मिलने पर बोनमैरो बायोप्सी भी की जाती है।
लक्षण : थकावट, सिर की वेदना, सांस फूलना, चक्कर आना, धड़कनें अनियंत्रित होना, त्वचा पीली पडऩा, शरीर पर चकत्ते पडऩा, मसूढ़ों और नाक से ब्लीडिंग व पैरों में सूजन आदि।

उपचार : -

एप्लास्टिक एनीमिया का उपचार स्थिति की गंभीरता के अनुसार किया जाता है।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन : एनीमिया होने पर लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी) और प्लेटलेट्स चढ़ाते हैं।
बोनमैरो ट्रांसप्लांट : रीढ़ की अस्थियों से स्टेम सेल लेकर लैब में इनकी संख्या बढ़ाकर मरीज में ट्रांसप्लांट करते हैं।


औषधियाँ : यदि यह व्याधि ऑटोइम्यून होता है तो ऐसी औषधियाँ देते हैं जो अधिक सक्रिय इम्यून सिस्टम को सामान्य करती हैं।
बचाव : -

आर्थराइटिस की औषधियाँ डॉक्टर के परामर्श से ही लें।


कीटनाशक या कैमिकल से दूरी बनाएं। हेपेटाइटिस व एचआईवी से बचाव के लिए सुरक्षा उपाय अपनाएं।


नोट : -  रक्तमें आरबीसी-ऑक्सीजन की पूर्ति, डब्लूबीसी-संक्रमण से बचाव और प्लेटलेट्स- थक्का बनाने में सहायता करता है।
डॉ.प्रकाश, डायरेक्टर, अमेरिकन होम्यो क्लीनिक, ईलम राम चौक, बेतिया, पश्चिमी चंपारण, 845438, बिहार ।
संपर्क करें - 📲 09135167135.


यदि आपको भी ऐसी कोई  समस्या है तो आयरन की कमी को पूरा करने के लिए -
▶ सेब,
▶ अनार,
▶ पपीता व
▶ सब्जी में पालक,
▶ मेथी,
▶ गाजर,
▶ बथुआ,
▶ चुकंदर,
▶ अंजीर आदि का सेवन करें।
▶ मुनक्का को रात में लोहे की कड़ाही में जल में 6 घंटे भिगोने के बाद प्रयोग करें, ऐसा करने से तेजी से रक्त में आयरन की मात्रा बढ़ेगी। साथ ही प्रतिदिन 15 मिनट वरूण मुद्रा योग करें तो जल्द ही रक्त की कमी पूरी हो जाएगी।
 वरूण मुद्रा- किसी समतल स्थान पर आसन बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। गहरी सांस लें और छोड़ें। सबसे छोटी अंगुली तथा अंगूठे के पोर को मिलाकर शेष अंगुलियों को सीधा रखा जाए तो वरूण मुद्रा बनती है। इस मुद्रा  का अभ्यास प्रतिदिन पंद्रह मिनट करें।
लाभ - यह मुद्रा रक्त संचार संतुलित करने, चर्मरोग से मुक्ति दिलाने, रक्त की कमी (एनीमिया) को दूर करने में सहायक है। वरुण मुद्रा के नियमित अभ्यास से शरीर में जल की कमी से होने वाली कई व्याधियाँ समाप्त हो जाती हैं। जल की कमी से ही शरीर में रक्त से संबंधित समस्याएं होती हैं। यह मुद्रा त्वचा को सुन्दर बनाती है।
Advertise with us. Call : 7004015174.


हमारे द्वारा प्रकशित इस लेख  ” Like & Share “ करना न भूले 
जिससे की हमारी यह जानकरी ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुँचे ।
 हमारे इस प्रयास में भागीदारी बने,
धन्यवाद !