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शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

कैंसर - रोग हीं बिजनेस

*( कैंसर - रोग नहीं बिजनेस )*
************************************
☝🏼जानें चौंकाने वाला सच कैंसर के बारे में :-

भले ही आपको इस बात पर यकीन न हो रहा हो...

लेकिन,
यह पूरी जानकारी पढ़ने के बाद -

आप भी यही कहेंगे कि -

*कैंसर कोई बीमारी नहीं...*
*बल्कि,*
*चिकित्सा जगत में पैसा कमाने का साधन मात्र है।*
पिछले कुछ सालों में -
कैंसर को एक तेजी से बढ़ती बीमारी के रूप में प्रचारित किया गया।

जिसके -ईलाज के लिए -
कीमोथैरेपी, सर्जरी या और उपायों को अपनाया जाता है,
जो महंगे होने के साथ-साथ...

मरीज के लिए उतने ही खतरनाक भी होते हैं।

*लेकिन,*
*अगर हम कहें कि -*
*कैंसर जैसी कोई बीमारी है ही नहीं तो ?*

जी हां...

*यह बात बिल्कुल सच है कि -*
*कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को स्वास्थ्य जगत में -*
*कैंसर का नाम दिया गया है...*
*और,*
*इससे अच्छी खासी कमाई भी की जाती है।*

लेकिन,
इस विषय पर लिखी गई एक किताब -

*वर्ल्ड विदाउट कैंसर*

जो कि कैंसर से बचाव के हर पहलू को इंगित करती है...
और,
अब तक विश्व की कई भाषाओं में ट्रांसलेट की जा चुकी है !

*इस किताब का दावा है कि -*
*कैंसर कोई बीमारी नहीं...*
*बल्कि,*
शरीर में विटामिन *बी17* की कमी होना है।

*आपको यह बात जरूर जान लेना चाहिए कि -*
*कैंसर नाम की कोई बीमारी है ही नहीं...*

*बल्कि,*
*यह शरीर में विटामिन बी17 की कमी से ज्यादा कुछ भी नहीं है।*

*इस कमी को ही कैंसर का नाम देकर...*
*चिकित्सा के क्षेत्र में एक व्यवसाय के रूप में स्थापित कर लिया गया है।*
*जिसका फायदा मरीज को कम...*
*और,*
*चिकित्सकों को अधिक होता है।*

*चूंकि,*
*कैंसर मात्र शरीर में किसी विटामिन की कमी है...*
*तो -*
*इसकी पूर्ति करके इसे कम किया जा सकता है...*
*और,*
*इससे बचा जा सकता है।*

यह उसी तरह का मसला है -
जैसे सालों पहले 'स्कर्वी' रोग से कई लोगों की मौते होती थी...

लेकिन,
बाद में खोज में यह सामने आया कि -
यह कोई रोग नहीं...
बल्कि,
विटामिन सी की कमी या अपर्याप्तता थी।

*कैंसर को लेकर भी कुछ ऐसा ही है।*

*विटामिन बी 17 की कमी को कैंसर का नाम दिया गया है..*
*लेकिन,*
*इससे डरने या मानसिक संतुलन खोने की जरूरत नहीं है।*
बल्कि,
आपको इसकी स्थिति को समझना होगा...
और,
*उसके अनुसार -*
इसके वैकल्पिक उपायों को अपनाना होगा।

इस कमी को पूरा करने के लिए-
*फ्रूट स्टोन, खूबानी, सेब, पीच, नाशपाती, फलियां, अंकुरित दाल व अनाज, मसूर के साथ ही बादाम विटामिन बी 17 का बेहतरीन स्त्रोत है।*

इनके अलावा -
*स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, ब्लैक बेरी, कपास व अलसी के बीच, जौ का दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस, धान, कद्दू, ज्वार, अंकुरित गेहूं, ज्वारे, कुट्टू, जई, बाजरा, काजू, चिकनाई वाले सूखे मेवे आदि विटामिन बी17 के अच्छे स्त्रोत हैं।*

*गौ-पियुष विटामिन बी 17 का बेहतरीन स्त्रोत है। इसलिये अपने जीवन मे गौ-पियुष के बेहतरीन स्त्रोत धन्वंतरी द्धारा प्रस्तुत कैप्सूल इम्युरिच का नियमित रूप से इस्तेमाल करे।*

इन्हें अपनी रोज की डाइट में शामिल करके...

*आप कैंसर से यानि इस विटामिन की कमी से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं।*

रोज 45 मिनिट योगा करे।

खासकर कपालभाति।

कपालभाति से शरीर के किसी भी हिस्से में हुए गठान या कैंसर को खत्म किया  जा सकता है।

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

विटामिन - ए के प्रमुख स्रोत क्या हैं ?




कब क्या खाएं क्या नहीं खाएं

पुराने समय की कहावत है - - -

चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल ।।
सावन साग, भादौ दही²। कुवांर  करेला, कार्तिक मही³ ।।
अगहन जीरा, पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना।।
जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै।।।।

किस माह में क्या न खाएँ

आवश्यक निर्देश
चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं
बैसाख माह में नया तेल न लगाएं
जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए
आषाढ़ माह में पका बेल न खाएं
सावन माह में साग न खाएं
भादों माह में दही न खाएं
क्वार माह में करेला न खाएं
कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं
अगहन माह में जीरा न खाएं
पूस माह में धनिया न खाएं
माघ माह में मिश्री न खाएं
फागुन माह में चना न खाएं

अन्य निर्देश

स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें ।
भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये ।
रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये ।
प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये ।
सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें।
मल, मूत्र, छीक का वेग नही रोकना चाहिये ।
ऋतु (मौसमी) फल खाना चाहिये..रसदार फलों के अलावा अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिये..रात्रि में फल नहीं खाना चाहिये ।
भोजन करते समय जल कम से कम पियें ।भोजन के पश्चात् कम से कम 45 मिनट के बाद जल पीना चाहिए
नेत्रों में सुरमा / काजल अवस्य लगायें.स्नान रोजाना अवश्य करना चाहिये ।
सूर्य की ओर मुह करके पेशाब न करें.बरगद, पीपल, देव मन्दिर, नदी व शमशान् में पेशाब न करें ।
गंदे कपड़े न पहने, इससे हानि होती है ।
भोजन के समय क्रोध न करें बल्कि प्रसन्न रहें।आवश्यकता से अधिक बोलना भी नहीं चाहिये व बोलते समय भोजन करना रोक दें
ईश्वर आराधना अवश्य करनी चाहिये ।

चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं  (15 march-15april)
बैसाख माह में नया तेल न लगाएं (16April-15may)
जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए (16May-15june)
अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं  (16june-15july)
सावन माह में साग न खाएं  (16july-15August)
भादों माह में दही न खाएं  (16august-15september)
क्वार माह में करेला न खाएं  (16september-15october)
कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं (16October-15november)
अगहन माह में जीरा न खाएं  (16 November -15 December)
पूस माह में धनिया न खाएं  (16 Dec- 15 jan)
माघ माह में मिश्री न खाएं  (16jan-15feb)
फागुन माह में चना न खाएं (16 feb- 14march )

1. पंथ=रास्ता। जेठ माह में दिन में रास्ता नहीं चलना चाहिए।
2. दही=मट्ठा या दही व दही से बने पदार्थ। ऐसी कहावत है कि भादो मास में दही या मट्ठा अगर घास या दूब की जड़ में डाल दें तो उसको भी फूक देता है। अर्थात् भादो मास में दही व दही से बने पदार्थ काफी हानिकारक हैं।
3. मही=भूमि पर कार्तिक मास में न सोएँ।

सोमवार, 11 जून 2018

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शुक्रवार, 1 जून 2018

ह्रदय रोग अनुचित खान-पान एवं रहन-सहन की देन है पर सही चिकित्सा से हो सकता है क्योर – ड़ॉ. पवित्रन !
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