बच्चों में कुपोषण एक गंभीर समस्या है । इस समस्या से बच्चों को बचाने के लिए कुछ ठोस प्रयास की आवश्यकता होती है ।
आइये जानते है कि कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें कैसे इस समस्या से बचा सकते हैं ।
👌पहला एक प्रमुख पहचान बच्चों की ऊँचाई की तुलना में उनका वजन कम होना है ।
👌दूसरा एक प्रमुख पहचान आयु की तुलना में वजन कम होना है ।
👌उन्नत साफ-सफाई का ध्यान भी बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव डालता है ।
👌५ वर्ष से कम आयु के बच्चों की माँ का अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसका प्रभाव भी अंततः बच्चे के स्वास्थ्य पर ही पड़ता है ।
👌बिभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की भोजन में कमी बच्चों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है ।
👌बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मुख्यरूप से उनके दैनिक आहार में यह विशेष ध्यान रखें कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा के साथ-साथ विटामिन्स एवं खनिज लवणों का भरपूर प्रयोग हो ।
👌कुपोषण के कारण बच्चों एवं महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है , जिससे वे काफी सरलता से विभिन्न प्रकार के व्याधियों से ग्रस्त हो जाते हैं ।
👌कुपोषण के कारण होनेवाले प्रमुख व्याधियों में बौनापन या ठिगनापन, रक्ताल्पता अर्थात शरीर में रक्त की कमी, घेंघा, रतौंधी, दिनौंधी, सुखंडी, अंधत्व इत्यादि शामिल हैं । इनके अलावा भी कई अन्य व्याधियां हैं जो कुपोषण या भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण होती हैं ।
व्याधि हो जाने पर चिकित्सा के साथ-साथ पौष्टिक आहार का ध्यान रखना अति आवश्यक है ।
ड़ॉ. प्रकाश
अमेरिकन होम्यो क्लीनिक
ईलम राम चौक,
पश्चिमी चंपारण,
बेतिया - 845438
बिहार, भारत.
मो. नं. - 7004015174
Email - americanhomeo@gmail.com
Website - homoeopathydrprakash.blogspot.com
आइये जानते है कि कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें कैसे इस समस्या से बचा सकते हैं ।
👌पहला एक प्रमुख पहचान बच्चों की ऊँचाई की तुलना में उनका वजन कम होना है ।
👌दूसरा एक प्रमुख पहचान आयु की तुलना में वजन कम होना है ।
👌उन्नत साफ-सफाई का ध्यान भी बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव डालता है ।
👌५ वर्ष से कम आयु के बच्चों की माँ का अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसका प्रभाव भी अंततः बच्चे के स्वास्थ्य पर ही पड़ता है ।
👌बिभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की भोजन में कमी बच्चों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है ।
👌बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मुख्यरूप से उनके दैनिक आहार में यह विशेष ध्यान रखें कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा के साथ-साथ विटामिन्स एवं खनिज लवणों का भरपूर प्रयोग हो ।
👌कुपोषण के कारण बच्चों एवं महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है , जिससे वे काफी सरलता से विभिन्न प्रकार के व्याधियों से ग्रस्त हो जाते हैं ।
👌कुपोषण के कारण होनेवाले प्रमुख व्याधियों में बौनापन या ठिगनापन, रक्ताल्पता अर्थात शरीर में रक्त की कमी, घेंघा, रतौंधी, दिनौंधी, सुखंडी, अंधत्व इत्यादि शामिल हैं । इनके अलावा भी कई अन्य व्याधियां हैं जो कुपोषण या भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण होती हैं ।
व्याधि हो जाने पर चिकित्सा के साथ-साथ पौष्टिक आहार का ध्यान रखना अति आवश्यक है ।
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