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गुरुवार, 5 जनवरी 2017

Menstruation

Menstruation मासिकधर्म -
मासिकधर्म अर्थात पीरियड्स एक ऐसी समस्या है जिससे प्रत्येक महीने प्रत्येक स्त्री को सामना करना ही पड़ता है । हम इसे सामान्य प्रक्रिया मान लेतें हैं और जो कष्ट होती है उन्हें भी सामान्य मान कर उनके पीछे का कारण जानने की कोशिश नहीं करते । लेकिन वास्तव में हमारे शरीर के साथ कुछ हो रहा है तो हमें पता होनी चाहिए ।
तो आइए हम आपको मासिकधर्म से जुड़ीं बातों को बताते हैं । यदि आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी और उपयोगी लगाती है तो इसे औरों को भी बताएं हमारा लिंक शेयर करें ताकि वो भी आपकी तरह लाभान्वित हो सकें ।
हिन्दू धर्म के अनुसार स्त्रियों को ही मासिक धर्म क्यों होता है । आइये जानें -
हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथ भागवतपुराण के अनुसार, एक बार देवताओं के गुरु देवराज इंद्र क्रोधित हो गए । इसी का लाभ उठाकर दैत्यों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और इंद्र को अपना सिंघासन छोड़ कर भागना पड़ा ।
तब इस समस्या का समाधान करते हुए ब्रह्मा जी ने उन्हें कहा कि उन्हें किसी ब्रह्मज्ञानी की सेवा करनी चाहिये, इससे उनका सिंघासन वापस मिल सकता है । इसी बात को मान कर इंद्रदेव ने ब्रह्मज्ञानी की सेवा की । ब्रह्मज्ञानी की माता एक असुर थीं, परन्तु ब्रह्मा जी इस बात से अपरिचित थे । इसी कारण से उस ब्रह्मज्ञानी के बुद्धि में असुरों के लिए एक अलग स्थान था और इसीलिए वह इंद्रदेव की सारी हवन सामग्री देवताओं के स्थान पर असुरों को चढ़ा रहा था । इस बात का पता चलने पर इंद्रदेव ने क्रोध में आकर उस ब्रह्मज्ञानी की हत्या कर दी । जिससे उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप चढ़ा । जो एक राक्षस के रूप में उनके पीछे पड़ गया ।
इससे बचने के लिए इंद्रदेव एक पुष्प में छुपे हुए थे और एक लाख वर्ष तक उन्होंने भगवान विष्णु की तपस्या की । तब भगवान विष्णु ने इस पाप से छुटकारे के लिए इंद्र को एक उपाय सुझाया । भगवान ने इंद्र को सुझाया कि वे इस पाप के कुछ अंश को पेड़, पृथ्वी, जल और स्त्री को दे दे । इंद्र ने इसके लिए चारों को मन लिया । इंद्र ने ब्रह्म हत्या के पाप का एक चौथाई भाग पेंड़ को दिया और साथ ही ये वरदान भी दिया कि वह कभी भी अपने आप को जीवित भी कर सकता है ।
पाप का एक चौथाई  भाग जल के लेने पर उसे यह वरदान मिला कि वह किसी भी वस्तु को स्वच्छ कर सकेगा । पृथ्वी को वरदान मिला कि उसकी सभी चोटें अपने आप भर जायेंगीं । इंद्र ने स्त्री को यह वरदान दिया कि वह पुरुषों के अपेक्षा काम अर्थात शारीरिक सम्बन्ध का दोगुना आनंद ले पायेगी । वहीँ इसके लिए स्त्रियों को प्रत्येक माह मासिक धर्म कि यातना भी झेलनी पड़ेगी ।
आइये अब इसे विस्तार से जानते हैं -
👌 कब आता है पहला मासिकधर्म ?
लड़कियों में मासिकधर्म प्रारम्भ होने की औसत आयु 12 वर्ष है । परंतु किसी किसी को 8 से 15 वर्ष की आयु में आना भी सामान्य माना जाता है । लेकिन यदि 15 वर्ष की आयु तक भी नहीं आया तो निश्चितरूप से चिकित्सकीय आवश्यकता है, इसे अनदेखी न करें आज ही हमसे संपर्क करें ।
👌 पेट में मरोड़ उठने का कारण क्या है ?
लगभग 70 % महिलायों को पेट में मरोड़ एवं सूजन की समस्याओं का सामना करना ही पड़ता है । चूंकि मासिकधर्म के समय गर्भाशय पेशी, गर्भाशय ग्रीवा में से रक्त एवं कोशिकाओं को दबाव बना कर बाहर निकालती हैं इसीलिए इसकी मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं । जो इस मरोड़ और पेट में वेदना का कारण बनती हैं । जिन महिलाओं को बहुत अधिक मरोड़ उठती हैं उनमें endometriosis या fibroids की समस्या हो सकती है जो की अल्ट्रासाउंड द्वारा जाना जा सकता है । यदि ऐसी समस्या है या अनुभव हो रहा है तो इसके समाधान हेतु अविलंब हमसे संपर्क करें ।
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