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सोमवार, 9 जनवरी 2017

गॉल ब्लाडर में पथरी कारण और निवारण




शरीर में  मुख्यरूप से गॉलब्लैडर, किडनी और मूत्राशय में स्टोन अर्थात पथरी जब बन जाती है तो यह व्यक्ति के लिए एक काफी कष्टकारक स्थिति होती है । पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पथरी का बनना अत्यधिक पाया जाता है ।
👌गॉलब्लैडर में पथरी क्यों हो जाता है ?
भोजन में कम फाईबर, रिफाईन शुगर और असंतृप्त कैलोरी के कारण पित्तपथरी होने की संभावना अत्यधिक होती है ।
कुछ लोगों को शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाने के कारण भी हो जाता है ।
कुछ लोग अपने शरीर का वजन तेजी से घटने के लिए कुछ  विशेष औषधियों का सेवन करने लगते हैं  जो वजन को एकदम से कम कर देते हैं या वजन घटाने की सर्जरी या कम कैलोरी वाली आहार भी एक कारण बन जाती है ।
👌इसका निवारण क्या है ?
जिस स्थान पर पीड़ा हो रही हो उस स्थान पर कैस्टर ऑयल अर्थात अरंडी का तेल लगाने से पीड़ा कम करने में सहायता मिलती है । प्राकृतिक पदार्थों का सेवन , जंक और फास्ट फूड से बचाव कर अपने जीवन शैली में सुधार पित्तपथरी में काफी सहायक होता है ।
कई सब्जियों को एक साथ काट कर उनका जूस निकाल कर निम्बू के रस के साथ सेवन भी लाभदायक होता है ।
सेब का जूस या सेब का सिरका पीने से भी वेदना में लाभ प्राप्त होता है । यह लिवर द्वारा बनने वाले कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है ।
Dr. Prakash
American Homoeo Clinic,
Ellam ram Chowk,
Bettiah - 845438,
West Champaran,
Bihar,
India.


रविवार, 8 जनवरी 2017

बच्चों को कुपोषण से कैसे बचाएं ।

बच्चों में कुपोषण एक गंभीर समस्या है । इस समस्या से बच्चों को बचाने के लिए कुछ ठोस प्रयास की आवश्यकता होती है ।
आइये जानते है कि कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें कैसे इस समस्या से बचा सकते हैं ।
👌पहला एक प्रमुख पहचान बच्चों की ऊँचाई की तुलना में उनका वजन कम होना है ।
👌दूसरा एक प्रमुख पहचान आयु की तुलना में वजन कम होना है ।
👌उन्नत साफ-सफाई का ध्यान भी बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव डालता है ।
👌५ वर्ष से कम आयु के बच्चों की माँ का अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसका प्रभाव भी अंततः बच्चे के  स्वास्थ्य पर ही पड़ता है ।
👌बिभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की भोजन में कमी बच्चों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है ।
👌बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मुख्यरूप से उनके दैनिक आहार में यह विशेष ध्यान रखें कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा के साथ-साथ विटामिन्स एवं खनिज लवणों का भरपूर प्रयोग हो ।
👌कुपोषण के कारण बच्चों एवं महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है , जिससे वे काफी सरलता से विभिन्न प्रकार के व्याधियों से ग्रस्त हो जाते हैं ।
👌कुपोषण के कारण होनेवाले प्रमुख व्याधियों में बौनापन या ठिगनापन, रक्ताल्पता अर्थात शरीर में रक्त की कमी, घेंघा, रतौंधी, दिनौंधी, सुखंडी, अंधत्व इत्यादि शामिल हैं । इनके अलावा भी कई अन्य व्याधियां हैं जो कुपोषण या भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण होती हैं ।
व्याधि हो जाने पर चिकित्सा के साथ-साथ पौष्टिक आहार का ध्यान रखना अति आवश्यक है ।


ड़ॉ. प्रकाश
अमेरिकन होम्यो क्लीनिक
ईलम राम चौक,
पश्चिमी चंपारण,
बेतिया - 845438
बिहार, भारत.
मो. नं. - 7004015174
Email - americanhomeo@gmail.com
Website - homoeopathydrprakash.blogspot.com








शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

हीमोग्लोबिन

🍐 *हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले आहार* 🍎

भोजन में अनेक पोषक तत्व होते हैं जो शरीर का विकास करते हैं, उसे स्वस्थ रखते हैं और शक्ति hm प्रदान करते हैं। हमें अपने आहार में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले फल एवं सब्जियों को शामिल करना चाहिए। हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के लिए संतुलित आहार, व्यायाम, भोजन में हरी सब्जियां, दालें, अनार आदि फल लेना चाहिए।

*हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले आहार के स्रोत*

*अमरूद*-- अमरूद जितना ज्यादा पका हुआ होगा, उतना ही पौष्टिक होगा। पके अमरूद को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती। इसलिए महिलाओं के लिए यह और भी लाभदायक हो जाता है।

*आम*-- आम खाने से हमारे शरीर में रक्ति अधिक मात्रा में बनता है, एनीमिया में यह लाभकारी होता है।

*सेब*-- सेब एनीमिया जैसी बीमारी में लाभकारी होता है। सेब खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन बनता है।

*अंगूर*-- अंगूर में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है, और हीमोग्लोबिन की कमी संबंधी बीमारियों को ठीक करने में सहायक होता है।

*चुकन्दर*-- चुकन्दर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता का लोह तत्व रक्त में हीमोग्लोबिन का निर्माण व लाल रक्तकणों की सक्रियता के लिए बेहद प्रभावशाली है। खून की कमी यानी एनीमिया की शिकार महिलाओं के लिए चुकंदर रामबाण के समान है। चुकन्दर के अलावा चुकन्दर की हरी पत्तियों का सेवन भी बेहद लाभदायी है। इन पत्तियों में तीन गुना लौह तत्व अधिक होता है।

*तुलसी*-- तुलसी रक्त की कमी को कम करने के लिए रामबाण है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।

*सब्जियां*-- शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। हरी सब्जियों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले तत्व ज्यादा मात्रा में पाये जाते है।

*तिल*-- तिल हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। तिल खाने से रक्ताअल्पता की बीमारी ठीक होती है।

*पालक*-- सूखे पालक में आयरन काफी मात्रा होती है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को ठीक करता है।

*नारियल*-- नारियल शरीर में उत्तकों, मांसपेशियों और रक्त जैसे महत्वपूर्ण द्रव्यों का निर्माण करता है, यह संक्रमण का सामना करने के लिए इन्जाइम और रोग प्रतिकारक तत्वों के विकास में सहायक होता है।

*गुड़*-- गुड़ में अधिक खनिज लवण होते है। जो हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायता करता है। .....
हीमोग्लोबिन या रक्ताल्पता या जॉन्डिस/कमला या हेपेटाइटिस या सूजन या स्त्री रोग संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए निःशुल्क परामर्श प्राप्त करें - 

💐 ड़ॉ. प्रकाश.
💐 अमेरिकन होम्यो क्लीनिक,
💐 ईलम राम चौक,
💐 बेतिया -  845438, पश्चिमी चंपारण, बिहार, भारत.
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गुरुवार, 5 जनवरी 2017

Menstruation

Menstruation मासिकधर्म -
मासिकधर्म अर्थात पीरियड्स एक ऐसी समस्या है जिससे प्रत्येक महीने प्रत्येक स्त्री को सामना करना ही पड़ता है । हम इसे सामान्य प्रक्रिया मान लेतें हैं और जो कष्ट होती है उन्हें भी सामान्य मान कर उनके पीछे का कारण जानने की कोशिश नहीं करते । लेकिन वास्तव में हमारे शरीर के साथ कुछ हो रहा है तो हमें पता होनी चाहिए ।
तो आइए हम आपको मासिकधर्म से जुड़ीं बातों को बताते हैं । यदि आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी और उपयोगी लगाती है तो इसे औरों को भी बताएं हमारा लिंक शेयर करें ताकि वो भी आपकी तरह लाभान्वित हो सकें ।
हिन्दू धर्म के अनुसार स्त्रियों को ही मासिक धर्म क्यों होता है । आइये जानें -
हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथ भागवतपुराण के अनुसार, एक बार देवताओं के गुरु देवराज इंद्र क्रोधित हो गए । इसी का लाभ उठाकर दैत्यों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और इंद्र को अपना सिंघासन छोड़ कर भागना पड़ा ।
तब इस समस्या का समाधान करते हुए ब्रह्मा जी ने उन्हें कहा कि उन्हें किसी ब्रह्मज्ञानी की सेवा करनी चाहिये, इससे उनका सिंघासन वापस मिल सकता है । इसी बात को मान कर इंद्रदेव ने ब्रह्मज्ञानी की सेवा की । ब्रह्मज्ञानी की माता एक असुर थीं, परन्तु ब्रह्मा जी इस बात से अपरिचित थे । इसी कारण से उस ब्रह्मज्ञानी के बुद्धि में असुरों के लिए एक अलग स्थान था और इसीलिए वह इंद्रदेव की सारी हवन सामग्री देवताओं के स्थान पर असुरों को चढ़ा रहा था । इस बात का पता चलने पर इंद्रदेव ने क्रोध में आकर उस ब्रह्मज्ञानी की हत्या कर दी । जिससे उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप चढ़ा । जो एक राक्षस के रूप में उनके पीछे पड़ गया ।
इससे बचने के लिए इंद्रदेव एक पुष्प में छुपे हुए थे और एक लाख वर्ष तक उन्होंने भगवान विष्णु की तपस्या की । तब भगवान विष्णु ने इस पाप से छुटकारे के लिए इंद्र को एक उपाय सुझाया । भगवान ने इंद्र को सुझाया कि वे इस पाप के कुछ अंश को पेड़, पृथ्वी, जल और स्त्री को दे दे । इंद्र ने इसके लिए चारों को मन लिया । इंद्र ने ब्रह्म हत्या के पाप का एक चौथाई भाग पेंड़ को दिया और साथ ही ये वरदान भी दिया कि वह कभी भी अपने आप को जीवित भी कर सकता है ।
पाप का एक चौथाई  भाग जल के लेने पर उसे यह वरदान मिला कि वह किसी भी वस्तु को स्वच्छ कर सकेगा । पृथ्वी को वरदान मिला कि उसकी सभी चोटें अपने आप भर जायेंगीं । इंद्र ने स्त्री को यह वरदान दिया कि वह पुरुषों के अपेक्षा काम अर्थात शारीरिक सम्बन्ध का दोगुना आनंद ले पायेगी । वहीँ इसके लिए स्त्रियों को प्रत्येक माह मासिक धर्म कि यातना भी झेलनी पड़ेगी ।
आइये अब इसे विस्तार से जानते हैं -
👌 कब आता है पहला मासिकधर्म ?
लड़कियों में मासिकधर्म प्रारम्भ होने की औसत आयु 12 वर्ष है । परंतु किसी किसी को 8 से 15 वर्ष की आयु में आना भी सामान्य माना जाता है । लेकिन यदि 15 वर्ष की आयु तक भी नहीं आया तो निश्चितरूप से चिकित्सकीय आवश्यकता है, इसे अनदेखी न करें आज ही हमसे संपर्क करें ।
👌 पेट में मरोड़ उठने का कारण क्या है ?
लगभग 70 % महिलायों को पेट में मरोड़ एवं सूजन की समस्याओं का सामना करना ही पड़ता है । चूंकि मासिकधर्म के समय गर्भाशय पेशी, गर्भाशय ग्रीवा में से रक्त एवं कोशिकाओं को दबाव बना कर बाहर निकालती हैं इसीलिए इसकी मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं । जो इस मरोड़ और पेट में वेदना का कारण बनती हैं । जिन महिलाओं को बहुत अधिक मरोड़ उठती हैं उनमें endometriosis या fibroids की समस्या हो सकती है जो की अल्ट्रासाउंड द्वारा जाना जा सकता है । यदि ऐसी समस्या है या अनुभव हो रहा है तो इसके समाधान हेतु अविलंब हमसे संपर्क करें ।
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अल्कालाईन जल - अनमोल उपहार

 *सिर्फ  एक बार के ही 3000/- खर्च में अपने स्वास्थ्य की सम्पूर्ण सुरक्षा*
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पोषाहार भोजन एंव शुध्द पानी के बिना कोई भी मानव पुरी तरह से स्वस्थ नहीं रह सकता है और जो व्यक्ति स्वस्थ नहीं है उसके चेहरे से हमेंशा सर्वथा कांति नहीं  रहती हैं ! कोई भी मनुष्य चाहे धनी हो या अत्यंत  निर्धन हो वह अपने शरीर से बहुत प्यार करता है क्योंकि स्वस्थ शरीर के बिना कुशल जीवन यापन की कल्पना नहीं कर सकते ! जैसे-जैसे लोग आधुनिक युग में ढलते जा रहें हैं वैसे-वैसे लोग अपनी अच्छी आदतें को भुलते जा रहे हैं जिसे मानव जीवन पर प्रतिकुल असर दिखाई दे रहा है ! अपने शरीर को फिट या स्वस्थ्य रखने के लिए लोग आजकल चिकित्सक या डाॅक्टर से परामर्श लेकर औषधि खरीदकर खा रहें हैं लेकिन समस्या दूर हटने का नाम ही नहीं ले रही है !
      आजकल नई-नई औषधियों की प्रतिष्ठानें खुल रही है, डाॅक्टरों की संख्याएँ भी बढ़ रही है चौक- चौराहे पर नये-नये हाॅस्पीटल खुल रही है फिर भी व्याधि कम होने का नाम नहीं ले रही है ! यदि स्थिति यही रहा तो आप मानव जीवन की भविष्य की कल्पना स्वं कर सकते हो कि क्या होगा....??
    यदि आप श्रेष्ठजनों की बात स्वास्थ्य के बारे में करते सुनें होगें तो यह भी जरूर सुनें होगें कि अच्छी स्वास्थ्य के लिए अधिक जल पीएँ और आज भी चिकित्सक या डाॅक्टर हर व्यक्ति को यही परामर्श देतें हैं कि अधिक जल पियो !
 हमारे शरीर में जल की मात्रा लगभग 99% रहती है इस प्रकार जीवित शरीर में जल का अधिक महत्व है ! यही कारण है कि व्याधिग्रस्त व्यक्ति के शरीर में सलाईन चढ़ाई जाती है और भी बहुत कारण है !
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👉 सिर्फ  आलकालाईन जल पीने से ही शरीर के सारे टाॅक्सीन बाहर निकल जाते हैं ।
👉 व्याधिग्रस्त व्यक्ति को जल्दी ठीक होने के लिए अलकालाईन जल दी जाती है !
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